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हाईकोर्ट : भ्रष्टाचार के मामले में गोपीगंज के पूर्व थानाध्यक्ष रमेश चौबे के खिलाफ कार्रवाई पर लगाई रोक
Sun, 26 Dec 2021 02:30 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 26 Dec 2021 02:30 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि सत्र न्यायाधीश ने आदेश पारित करते हुए कानून के अनुसार मामले की निगरानी करने की बजाय योग्यता के आधार पर निर्णय लिया और मामले का फैसला किया।
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Allahabad High Court
- फोटो : social media
विस्तार
भ्रष्टाचार के मामले में भदोही जिले के पूर्व एसएचओ के खिलाफ पारित आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और मामले में राज्य सरकार व सपा नेता अबु आसिम आजमी से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की एकल खंडपीठ कर रही है। खंडपीठ ने यह आदेश रमेश चौबे की याचिका पर दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि सत्र न्यायाधीश ने आदेश पारित करते हुए कानून के अनुसार मामले की निगरानी करने की बजाय योग्यता के आधार पर निर्णय लिया और मामले का फैसला किया। जबकि, उनके सामने यह चुनौती देने के लिए कोई तथ्य नहीं थे कि अभियोजन पक्ष को वापस लेना या नहीं जनहित में, सदभाव में और न्याय, सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और शांति के व्यापक उद्देश्यों को बनाए रखने के लिए या यह सार्वजनिक हित के मामले को उलट देगा।
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याची को षड़यंत्र के तहत फंसाने का आरोप
इसे सही ठहराने के लिए कोई आधार नहीं है। याची का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभु राय ने इसी तरह के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले उत्तर प्रदेश राज्य बनाम एश्वर्या चौधरी उर्फ मौसम-2018 और उत्तर प्रदेश बनाम धीरज कुमार ओझा केस का हवाला दिया। तर्क दिया कि याची को सियासी षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है। याची गोपीगंज थाने का प्रभारी रहने के दौरान प्रतिबंधित मांस पकड़ा था।
प्रतिवादी ने शुरू में दबाव बनाकर उसे छुड़ाना चाहा। जब याची ने उसे नहीं छोड़ा तो अपनी सियासी षड़यंत्र के तहत फंसा दिया। याची के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की ओर से 25 अगस्त 2021 में आदेश भी पारित कर दिया। जबकि, याची ने मामले में विभाग के एडीजीसी के समक्ष मामले को उठाया था। सरकार भी मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है। घटना 30 जनवरी 2016 को हुई थी।
कोर्ट ने याची पक्ष के अधिवक्ता का तर्क स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा की गई कार्रवाई पर रोक लगाते हुए समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र के अध्यक्ष अबु आसिम आजमी और सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट ने सपा नेता को नोटिस जारी करने के लिए हापुड़ जनपद न्यायालय को निर्देशित किया है।
इसे सही ठहराने के लिए कोई आधार नहीं है। याची का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभु राय ने इसी तरह के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले उत्तर प्रदेश राज्य बनाम एश्वर्या चौधरी उर्फ मौसम-2018 और उत्तर प्रदेश बनाम धीरज कुमार ओझा केस का हवाला दिया। तर्क दिया कि याची को सियासी षड़यंत्र के तहत फंसाया गया है। याची गोपीगंज थाने का प्रभारी रहने के दौरान प्रतिबंधित मांस पकड़ा था।
प्रतिवादी ने शुरू में दबाव बनाकर उसे छुड़ाना चाहा। जब याची ने उसे नहीं छोड़ा तो अपनी सियासी षड़यंत्र के तहत फंसा दिया। याची के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की ओर से 25 अगस्त 2021 में आदेश भी पारित कर दिया। जबकि, याची ने मामले में विभाग के एडीजीसी के समक्ष मामले को उठाया था। सरकार भी मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है। घटना 30 जनवरी 2016 को हुई थी।
कोर्ट ने याची पक्ष के अधिवक्ता का तर्क स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा की गई कार्रवाई पर रोक लगाते हुए समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र के अध्यक्ष अबु आसिम आजमी और सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट ने सपा नेता को नोटिस जारी करने के लिए हापुड़ जनपद न्यायालय को निर्देशित किया है।