यूपी : हाईकोर्ट ने सरकार और प्रशासन से पूछा, चकबंदी अधिकारी का डेंगू से क्या संबंध
सुनवाई के दौरान स्थानीय प्रशासन की तरफ से हाईकोर्ट में उपस्थित सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि डेंगू की रोकथाम के लिए सरकार व जिला प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। बताया गया कि इसके लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिया गया है और इसमें चकबंदी अधिकारी को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
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प्रयागराज में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वयं कायम जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने सरकार व प्रयागराज प्रशासन से पूछा कि वह बताएं कि डेंगू की रोकथाम के लिए कंट्रोल रूम में तैनात चकबंदी अधिकारी का इस बीमारी से क्या संबंध है।
सुनवाई के दौरान स्थानीय प्रशासन की तरफ से हाईकोर्ट में उपस्थित सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि डेंगू की रोकथाम के लिए सरकार व जिला प्रशासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। बताया गया कि इसके लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिया गया है और इसमें चकबंदी अधिकारी को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
इस याचिका की सुनवाई कर रहे जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर एवं जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने चकबंदी अधिकारी की तैनाती को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि चकबंदी अधिकारी अब डॉक्टरों का भी काम करेंगे। कोर्ट ने पूछा यह बताया जाए कि इस भयंकर बीमारी की रोकथाम में चकबंदी अधिकारी का क्या योगदान है।
इसके पूर्व चीफ जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस जेजे मुनीर की बेंच ने शहर में महामारी का रूप ले रहे डेंगू को लेकर स्वयं कायम की गई जनहित याचिका में हाईकोर्ट के अधिवक्ता आईआर सिंह को बतौर न्याय मित्र कोर्ट का सहयोग करने को कहा था। कोर्ट में उपस्थित अधिवक्ता न्याय मित्र ने आज कोर्ट को बताया की प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए एक रोगी को शहर में मुसम्बी का जूस चढ़ा दिया गया। बाद में रोगी की मौत भी हो गई। कोर्ट ने इस पर न्याय मित्र से कहा कि वह इस घटना को लेकर कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करें।
न्याय मित्र ने डेंगू की रोकथाम के लिए की जा रही सरकारी कार्यवाही को महज एक खानापूर्ति बताया तथा कहा कि प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना होगा और इसके लिए संवेदनशील अधिकारियों की तैनाती करनी होगी। कोर्ट ने अब इस इस मामले में अपर महाधिवक्ता से 10 दिन में हलफनामा मांगा है तथा उसके बाद याचिका पर सुनवाई का निर्देश दिया है।