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High Court : मध्यस्थ को पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर फैसला देने का अधिकार नहीं
Mon, 20 Jul 2026 03:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 20 Jul 2026 03:58 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सहकारी समिति अधिनियम के तहत नियुक्त मध्यस्थ को किसी पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर फैसला देने या उसे शून्य घोषित करने का अधिकार नहीं है।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सहकारी समिति अधिनियम के तहत नियुक्त मध्यस्थ को किसी पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता पर फैसला देने या उसे शून्य घोषित करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल सिविल न्यायालय के पास है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने मेरठ निवासी भूपेंद्र सिंह की याचिका निस्तारित कर दी। याची ने मेरठ के संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक, सहकारिता के 29 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी।
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आयुक्त ने बतौर मध्यस्थ याची के पक्ष में निष्पादित बिक्री विलेख को शून्य घोषित कर दिया था। याची के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। दलील दी कि सहकारी समिति अधिनियम की मध्यस्थता की कार्यवाही में पंजीकृत बिक्री विलेख की वैधता की जांच नहीं की जा सकती। यदि किसी को बिक्री विलेख पर आपत्ति है तो उसे सिविल कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए। वहीं, प्रतिवादियों ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति उठाई। कहा कि याची के पास अपील का वैधानिक विकल्प उपलब्ध है। लिहाजा, याचिका पोषणीयता के आधार पर निरस्त की जानी चाहिए।
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हालांकि, कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा मामले में मध्यस्थ ने बिक्री विलेख को शून्य घोषित कर दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिक्री विलेख की वैधता का परीक्षण सहकारी समिति अधिनियम की कार्यवाही में नहीं किया जा सकता। इसलिए याचिका सुनवाई योग्य है।
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