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2234 कैदियों की पैरोल बढ़ाने को हाईकोर्ट की मंजूरी
Wed, 27 May 2020 07:23 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 27 May 2020 07:23 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉक डाउन के दौरान जेलों से पैरोल पर रिहा किए गए 2234 कैदियों की पैरोल बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। कोरोना महामारी को देखते हुए राज्य सरकार ने 10 अप्रैल 2020 के आदेश से प्रदेश की विभिन्न जेलों से रिहा 2234 कैदियों की पैरोल बढ़ाने का आदेश जारी किया था।
पैरोल की अवधि समाप्त हो रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने 24 मई 2020 को सर्कुलर जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को पैरोल बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसे देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैरोल बढ़ाने की मांग में दाखिल अर्जियों को निस्तारित कर दिया है और कहा है कि अलग से आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने सुशीला देवी की आपराधिक जनहित याचिका पर दिया है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए सात साल से कम सजा वाले आपराधिक मामले में जेल में बंद कैदियों की रिहाई पर राज्य सरकारों व हाईकोर्ट को गाइड लाइन बनाने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई। कोर्ट ने कमेटी के सुझावों पर विचार कर जेलों में बंद कैदियों की जमानत या पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। पैरोल की अवधि पूरी होने से पहले ही राज्य सरकार ने अवधि बढ़ाने का निर्देश जारी कर दिया, जिसे कोर्ट ने पर्याप्त माना है।
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पैरोल की अवधि समाप्त हो रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने 24 मई 2020 को सर्कुलर जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को पैरोल बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसे देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैरोल बढ़ाने की मांग में दाखिल अर्जियों को निस्तारित कर दिया है और कहा है कि अलग से आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने सुशीला देवी की आपराधिक जनहित याचिका पर दिया है।
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मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए सात साल से कम सजा वाले आपराधिक मामले में जेल में बंद कैदियों की रिहाई पर राज्य सरकारों व हाईकोर्ट को गाइड लाइन बनाने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई। कोर्ट ने कमेटी के सुझावों पर विचार कर जेलों में बंद कैदियों की जमानत या पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। पैरोल की अवधि पूरी होने से पहले ही राज्य सरकार ने अवधि बढ़ाने का निर्देश जारी कर दिया, जिसे कोर्ट ने पर्याप्त माना है।
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