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High Court : बार एसोसिएशन चुनाव में धनबल और बाहरी तत्वों की दखल पर हाईकोर्ट नाराज
Fri, 22 May 2026 06:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 22 May 2026 06:37 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन चुनाव में धनबल और वकालत में निष्क्रिय लोगों की दखल पर कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि अधिवक्ता मुवक्किल का मुखपत्र नहीं, कोर्ट का अधिकारी होता है।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन चुनाव में धनबल और वकालत में निष्क्रिय लोगों की दखल पर कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि अधिवक्ता मुवक्किल का मुखपत्र नहीं, कोर्ट का अधिकारी होता है। उसका पहला कर्तव्य सत्य और न्याय की स्थापना में सहयोग करना है, न कि बार की राजनीति को प्रदूषित करना।
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यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मऊ और बिजनौर जिला बार एसोसिएशन के चुनावी विवादों से जुड़ीं याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने कहा कि हाल के दिनों में यह प्रवृत्ति देखी गई है कि जो वकील नियमित रूप से प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं वे धन-बल के सहारे बार एसोसिएशनों के चुनावों को प्रभावित कर रहे हैं। इससे न्याय प्रणाली की गरिमा धूमिल हो रही है।
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याची बार संघों ने एल्डर कमेटी और निवर्तमान कार्यकारिणी की ओर से पारित चुनावी फैसलों की वैधता को चुनौती दी थी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर कहा कि चुनावों पर नियंत्रण पाने के लिए नियमों के बाहर जाकर बनाई गई कोई भी तदर्थ या समानांतर कमेटी पूरी तरह अवैध है।
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वन बार वन वोट के सिद्धांत पर तय समय में चुनाव का निर्देश
कोर्ट ने नियमों के विपरीत जाकर एल्डर्स कमेटी के गठन और निवर्तमान पदाधिकारियों की ओर से मनमाने तरीके से किए गए प्रस्तावों को तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया। साथ ही सभी बार संघों को मॉडल बायलॉज और वन बार वन वोट के सिद्धांत पर तय समयसीमा में चुनाव कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसके सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी अधिवक्ता कई बार एसोसिएशन का सदस्य हो सकता है पर वोट देने का अधिकार केवल उसी एसोसिएशन के चुनाव में होगा, जिस अदालत में वह सक्रिय वकालत करता है। इसका उल्लेख उसके सीओपी (प्रैक्टिस के स्थान का प्रमाणपत्र) में हो।
कोर्ट के निर्देश
1.उत्तर प्रदेश बार कौंसिल को इस फैसले की प्रति प्रेषित कर कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करे कि सभी अधिवक्ता संघ को बायलॉज के मुताबिक चुनाव कराएं। ऐसा न करने पर उनकी संबद्धता समाप्त होगी।
2.जिला व तहसील बार एसोसिएशन में एल्डर्स कमेटी पांच वरिष्ठ अधिवक्ताओं की होगी। इनका चयन बार कौंसिल में नामांकन की तिथि के आधार पर होगा। संबंधित अदालत में कम से कम 10 वर्ष की नियमित प्रैक्टिस जरूरी होगी। सबसे वरिष्ठ सदस्य चेयरमैन बनेगा।
3.कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म होने के बाद कमेटी को एक महीने में चुनाव कराना होगा। ऐसा न होने पर आमसभा बुलाकर चुनाव की तिथि तय की जाएगी। चुनाव के बाद चेयरमैन सेवानिवृत्त होगा और बाकी सदस्य वरिष्ठता के आधार पर नए सदस्य को शामिल करेंगे। सेवानिवृत्त सदस्य बाद में फिर शामिल हो सकेगा।