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High Court : खाता फ्रीज करने के मनमाने रवैये पर हाईकोर्ट नाराज, केंद्र और बैंकों से मांगा जवाब

Fri, 20 Feb 2026 08:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Feb 2026 08:28 PM IST
सार

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस और साइबर सेल के निर्देश पर बैंक के मनमाने तरीके से खाता फ्रीज करने पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि कानून की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही खाता फ्रीज होना चाहिए।

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High Court angry over arbitrary attitude of account freezing, seeks reply from Centre and banks
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस और साइबर सेल के निर्देश पर बैंक के मनमाने तरीके से खाता फ्रीज करने पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि कानून की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही खाता फ्रीज होना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार के भेदभाव या मनमानेपन की गुंजाइश न हो।

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बलिया निवासी तारकेश्वर तिवारी के छह खाते संबंधित बैंक ने फ्रीज कर दिए थे। बैंक से पता करने पर साइबर क्राइम ब्रांच बलिया से संपर्क करने के लिए कहा गया। याची ने उससे संपर्क किया तो उसे बैंक भेज दिया गया। इससे परेशान याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची के अधिवक्ता मलिक जुनैद अहमद ने दलील दी कि किसी भी व्यक्ति का बैंक खाता नियमानुसार बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के फ्रीज नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी बैंक मनमानी कर रहे हैं।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में बैंक केवल पुलिस या साइबर सेल के पत्र के आधार पर खाते फ्रीज कर देते हैं। खाताधारकों को इसकी पूरी जानकारी भी नहीं देते हैं। कोर्ट ने कहा कि बैंक और खाताधारकों के बीच आपसी विश्वास बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोग अपनी मेहनत की कमाई के लिए बैंकों पर भरोसा कर सकें।
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कोर्ट ने केंद्र सरकार और बैंक अधिकारियों से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी। कोर्ट कहा है कि बैंकों को उन पत्रों को रिकॉर्ड पर लाना होगा, जिनके आधार पर खाते फ्रीज किए गए हैं। साथ ही बैंकों को पिछले वित्तीय वर्ष का विस्तृत चार्ट और स्टेटमेंट भी पेश करना होगा। यदि कोई खाताधारक संपर्क करता है तो बैंक का यह कर्तव्य है कि वह उसे वांछित बैंक स्टेटमेंट उपलब्ध कराए। बैंकों को हलफनामे में यह स्पष्ट करना होगा कि क्या पूरा खाता फ्रीज किया गया है या केवल उतनी राशि परहोल्ड (लीयन) लगाया गया है, जिसका उल्लेख अधिकारियों के पत्र में था।


केंद्र सरकार को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को रिकॉर्ड पर रखने और यह बताने का निर्देश दिया गया है कि खाता फ्रीज करने से पहले की प्रक्रिया क्या है। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता आश्वस्त किया कि वे एक हलफनामा दाखिल कर बताएंगे कि किन वैधानिक नियमों के तहत खाता फ्रीज किया जा सकता है। याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया है कि वह अपने व्यावसायिक लेनदेन, बिलों और पिछले तीन वर्ष के आयकर रिटर्न का अतिरिक्त विवरण दाखिल करें। 26 फरवरी को सुनवाई।

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