हाईकोर्ट खफा : खुद को अनपढ़ व बालिग बताकर याचिका दाखिल करने वाले प्रेमी जोड़े पर जुर्माना
पीड़िता ने हलफनामा देते हुए कोर्ट को बताया था कि उसने कभी भी किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं की है, लिहाजा उसकी उम्र की जांच के लिए सीएमओ से मेडिकल जांच कराई जानी चाहिए। मामला वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र का है। घर से गायब होने पर पीड़िता के पिता ने उसके प्रेमी के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुद को अनपढ़ और बालिग बता कर याचिका दाखिल करने वाले प्रेमी जोड़े की याचिका खारिज करते हुए पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति शिव शंकर प्रसाद की खंडपीठ ने पीड़िता के प्रेमी के खिलाफ दर्ज अपहरण की एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए दिया।
पीड़िता ने हलफनामा देते हुए कोर्ट को बताया था कि उसने कभी भी किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं की है, लिहाजा उसकी उम्र की जांच के लिए सीएमओ से मेडिकल जांच कराई जानी चाहिए। मामला वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र का है। घर से गायब होने पर पीड़िता के पिता ने उसके प्रेमी के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी।
प्रेमी जोड़े ने खुद को बालिग बताते हुए संयुक्त रूप से याचिका दाखिल कर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। पीड़िता की उम्र के संबंध में कहा गया कि वह बालिग है, लेकिन उसने किसी स्कूल में कभी पढ़ाई नहीं की इसलिए उसके पास उम्र संबंधी कोई दस्तावेज नहीं हैं। कोर्ट के आदेश पर आयु निर्धारण के लिए पीड़िता की मेडिकल जांच की रिपोर्ट सीएमओ वाराणसी से सीलबंद लिफाफे में तलब की गई।
इसी बीच पीड़िता के पिता की ओर से पेश वकील ने जवाबी हलफनामे के साथ पीड़िता के प्राइमरी स्कूल के शैक्षिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिए। प्रेमी जोड़े की ओर से झूठा हलफनामा दाखिल करने से खफा कोर्ट ने बाल न्याय अधिनियम की धारा 94 का हवाला देते हुए पीड़िता की आयु निर्धारण की सीएमओ द्वारा प्रेषित सीलबंद रिपोर्ट को खोलने से इन्कार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि धारा 94 के अंतर्गत आयु निर्धारण के लिए सबसे पहले शैक्षिक प्रमाण पत्रों को वरीयता दी जाएगी। पिता द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र से स्पष्ट है कि पीड़िता नाबालिग है। कोर्ट ने प्रेमी जोड़े की ओर से झूठे हलफनामे पर दाखिल याचिका खारिज करते हुए पांच हजार का जुर्माना भी लगाया है।