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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: AMU Vice Chancellor should take a decision in two months in the matter of giving pension to the fi

High Court : तीन शादी के बावजूद पहली पत्नी पेंशन की हकदार, एएमयू कुलपति को दो माह में फैसला लेने का निर्देश

Sun, 17 Nov 2024 07:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 17 Nov 2024 07:16 PM IST
सार

तीन शादी करने के बावजूद कर्मचारी की मृत्यु के बाद पहली पत्नी ही पेंशन की हकदार है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। विवि के कर्मचारी ने तीन शादियां की थीं, उसकी मौत के बाद तीसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन मिलने के खिलाफ पहली पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

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High Court: AMU Vice Chancellor should take a decision in two months in the matter of giving pension to the fi
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली पत्नी को पेंशन देने के मामले में एएमयू के कुलपति को दो महीने के अंदर फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत ने सुल्ताना बेगम की याचिका पर दिया। याची सुल्ताना बेगम की शादी एएमयू के कर्मचारी मोहम्मद इशाक से 24 जून 1978 को हुई थी। शादी के कुछ साल बाद अनबन के चलते वह अपने पिता के घर रहने लगी।

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इस बीच इशाक ने दूसरी शादी कर ली। वहीं दूसरी पत्नी की मौत के बाद उन्होंने शादमा से तीसरी शादी कर ली। इस  बीच 24 अप्रैल 2024 को इशाक की मृत्यु हो गई और पारिवारिक पेंशन तीसरी पत्नी शादमा को मिलने लगी। याची सुल्ताना ने एएमयू के कुलपति को पत्र लिखकर नियमानुसार उसे पारिवारिक पेंशन देने की प्रार्थना की। सुनवाई नहीं होने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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याची के वकील डीसी द्विवेदी, शशि धर द्विवेदी ने दलील के दौरान गुवाहाटी हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले ''मुस्त जुनुफा बीबी बनाम मुस्त पद्मा बेगम'' का हवाला दिया। कहा कि मुस्लिम लॉ के अनुसार पहली पत्नी को ही पारिवारिक पेंशन पाने का अधिकार है। केंद्र सरकार के पारिवारिक पेंशन नियम के अनुसार भी पहली पत्नी को ही पारिवारिक पेंशन मिलना चाहिए। न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद कुलपति को दो माह के अंदर याची और विपक्षी को सुनकर फैसला देने का निर्देश दिया।

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