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हाईकोर्ट : हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए अपहरण व दुष्कर्म के आरोपी को किया बरी
Thu, 08 Oct 2026 04:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 08 Oct 2026 04:24 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए मेरठ के वर्ष 1986 के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए सुभाष को बरी कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए मेरठ के वर्ष 1986 के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए सुभाष को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने अपर सत्र न्यायाधीश, मेरठ के 26 सितंबर 1988 के फैसले को रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली।
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अभियोजन के अनुसार 25 फरवरी 1986 को सुभाष और उसके पिता शेरा पीड़िता को उसकी बहन की बीमारी का बहाना बनाकर घर से ले गए थे। अगले दिन रिपोर्ट दर्ज हुई और 11 मार्च को पीड़िता बरामद हुई। ट्रायल कोर्ट ने शेरा को बरी कर दिया था, जबकि सुभाष को अपहरण व दुष्कर्म का दोषी ठहराया था। आरोपी सुभाष ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने पाया कि एक्स-रे रिपोर्ट में पीड़िता की उम्र 19 वर्ष से अधिक थी और गवाही के दौरान उसने अपनी उम्र करीब 25 वर्ष बताई थी। मेडिकल जांच में शरीर पर चोट नहीं मिली। डॉक्टर ने भी दुष्कर्म के संबंध में निश्चित राय नहीं दी। अदालत ने कहा कि पीड़िता के कई स्थानों से गुजरने, सार्वजनिक जगहों पर रहने और आरोपी के साथ रहने के दौरान शोर नहीं मचाने जैसी परिस्थितियों से सहमति की संभावना से पूरी तरह इन्कार नहीं किया जा सकता। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
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