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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Hearing in the Mauni Amavasya incident case held in the High Court, the court raised questions on the actions

High Court: मौनी अमावस्या हादसे मामले में हाईकोर्ट सख्त, कोर्ट ने पूछा- मौतों व लापता लोगों का पता कौन लगाएगा

Wed, 19 Feb 2025 04:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 19 Feb 2025 04:28 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में संगम नोज पर महाकुंभ में मौनी अमावस्या की रात को हुए हादसे के संबंध में जारी जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। याची वकील ने मृतकों की संख्या पर सवाल खड़ा किए। हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों पर असंतुष्टी जाहिर करते हुए 24 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

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Hearing in the Mauni Amavasya incident case held in the High Court, the court raised questions on the actions
महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर भगदड़ मचने के बाद का भयावह दृश्य। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से 24 फरवरी तक महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुए हादसों की विस्तृत जानकारी तलब की है। पूछा है कि सरकार की ओर से गठित न्यायिकआयोग का काम घटना के कारणों व बचाव संबंधी सुझाव देना है तो हादसों के दौरान हुई मौतों व लापता लोगों का पता कौन लगाएगा।

यह सवाल मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति शैलेन्द्र क्षितिज की खंडपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय की ओर से हाईकोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कमेटी के गठन की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पूछा है।

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बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने मीडिया रिपोर्ट और हादसों की वायरल वीडियो फुटेज अदालत में पेश की। दलील दी कि याची मेला में ही कल्पवास कर रहे थे। मौनी अमावस्या पर एक नहीं तीन जगह भगदड़ हुई थी। सरकार की ओर से मृतकों की बताई गई संख्या गलत है।

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घटना के बाद खोया-पाया केंद्र से लापता लोगों के नामों की घोषणा करने के लिए पीड़ित परिजनों से लापता लोगों के आधार कार्ड मांगे जा रहे थे। मीडिया के रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों की संख्या सौ से ऊपर है। मामला संवेदनशील है। सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। लिहाजा, हाईकोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जाना जनहित मेें आवश्यक है।

वहीं, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध किया। कहा कि हादसे की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। एक माह में आयोग घटना के कारणों व भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने संबधी रिपोर्ट पेश करेगा।

हलांकि, कोर्ट ने सरकार की दलीलों से असंतुष्टी जताई। कहा कि आयोग गठन की अधिसूचना से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि आयोग का काम घटना के कारणों व बचाव के सुझाव देने तक सीमित है। सरकार मृतकों व लापता लोगों का सही पता कैसे लगाएगी, पूरी तरह अस्पष्ट है। लिहाजा, 24 फरवरी तक सरकार विस्तृत जानकारी पेश करें। साथ ही कोर्ट ने याची की ओर से हलफनामें संग पेश की गई हादसों की वीडियाे फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

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