{"_id":"677e407f3cf6904e360c3484","slug":"hearing-in-sambhal-jama-masjid-case-will-now-be-held-on-february-25-the-court-asked-the-hindu-side-to-file-a-2025-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP : हाईकोर्ट ने संभल मस्जिद विवाद मामले में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर लगाई रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP : हाईकोर्ट ने संभल मस्जिद विवाद मामले में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर लगाई रोक
Wed, 08 Jan 2025 02:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 08 Jan 2025 02:38 PM IST
सार
संभल जामा मस्जिद मामले में सिविल कोर्ट के सर्वे आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जवाब मांगते हुए सुनवाई के लिए अगली तिथि 25 फरवरी को मुकर्रर की है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट।
- फोटो : Amar ujala
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के चंदौसी की शाही जामा मस्जिद मामले की ट्रायल कोर्ट संभल में चल रही सुनवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने केंद्र व राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से जवाब मांगते हुए सुनवाई के लिए अगली तिथि 25 फरवरी नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने शाही जामा मस्जिद की इंतजामियां कमेटी की निगरानी याचिका पर दिया।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शाही जामा मस्जिद की ओर से दाखिल याचिका के अनुसार संभल की अदालत में 19 नवंबर 2024 को हरिशंकर जैन व अन्य की ओर से दीवानी मुकदमा दाखिल किया गया था। मुकदमे में शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाए जाने को दावा किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई करते हुए एडवोकेट कमीशन सर्वे का आदेश दिया। 24 नवंबर को इसी सर्वे को लेकर हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी। शाही मस्जिद की ओर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुनवाई पर रोक लगाने की मांग में याचिका दाखिल की गई।
विज्ञापन
बुधवार को शाही जामा मस्जिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने दलील दी कि 19 नवंबर 2024 को दीवानी मुकदमा दाखिल किया गया और उस पर तुरंत सुनवाई करते हुए सर्व आदेश दे दिया गया। उसी दिन सर्वे भी शुरू हो गया। वहीं 24 नवंबर को भी सर्वे किया गया जबकि इसके लिए सिविल कोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया था।
विज्ञापन
सर्वे आदेश की आगे की प्रक्रिया पर रोक लगाया जाए और मुकदमा पोषणीय नहीं है रद्द किया जाए। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए दलील दी कि पारित आदेश में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसमें कुछ भी अवैध नहीं है। कोर्ट ने याचिका पर सभी पक्षकारों से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने और याची से उसके दो सप्ताह बाद प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है।