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हॉकर ट्रैिंग से रोकेंगे गैसे सिलिंडर की चोरी
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Hawker tracking app will prevent gas theft
प्रयागराज। गैस चोरी, घटतौली और कालाबाजारी की शिकायतों से निजात पाने के लिए इंडियन ऑयल हॉकर ट्रैकिंग एप शुरू करने जा रहा है। एप सिलिंडर की होम डिलेवरी के दौरान क्यूआर कोड को पढ़ लेगा और वह सेंट्रल सिस्टम को डिलेवरी स्थान का अक्षांशीय और देशांतरीय ग्राफ (स्थान) भेज देगा। यह व्यवस्था पांच-छह दिनों में शुरू होगी।
इंडियन ऑयल के डिप्टी जीएम अबिकर पाल ने बताया कि एप को पूरी तरह से संचालित करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। प्रदेश के कुछ जिलों में इसे ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाना है। जिससे कि रसोई गैस सिलिंडर की घटतौली, गैस चोरी को रोका जा सके। ‘हॉकर ट्रैकिंग एप’ को सिलिंडर डिलेवरी मैन के मोबाइल पर अपलोड किया जाएगा। डिलेवरी मैन जब गैस एजेंसी के गोदाम से गैस सिलिंडर उठाएगा, उस दौरान एप से क्यूआर कोड के जरिए उसके टाइम को फीड कराया जाएगा। उपभोक्ताओं को इसकी डिलेवरी के दौरान हॉकरों को इसे अपडेट करना होगा। इस दौरान उपभोक्ता के घर की लोकेशन भी रिकार्ड होगी। इससे डिलेवरी की समय का पता चलेगा। अगर उसने गड़बड़ी करने की कोशिश की तो उसे आसानी से ट्रैस किया जा सकेगा।
हालांकि, इस योजना को लेकर अभी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि एप को संचालित करने के लिए डिलेवरी मैन के पास एंड्रॉयड फोन का होना जरूरी है। जो कि अभी नहीं है। इंडियन ऑयल की ओर से डिलेवरी मैन को एंड्रॉयड फोन मुहैया कराए जाने की कोई योजना नहीं है। अब एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी कि वह डिलेवरी मैन को एंड्रॉयड फोन मुहैया कराएं।
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इंडियन ऑयल के डिप्टी जीएम अबिकर पाल ने बताया कि एप को पूरी तरह से संचालित करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। प्रदेश के कुछ जिलों में इसे ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाना है। जिससे कि रसोई गैस सिलिंडर की घटतौली, गैस चोरी को रोका जा सके। ‘हॉकर ट्रैकिंग एप’ को सिलिंडर डिलेवरी मैन के मोबाइल पर अपलोड किया जाएगा। डिलेवरी मैन जब गैस एजेंसी के गोदाम से गैस सिलिंडर उठाएगा, उस दौरान एप से क्यूआर कोड के जरिए उसके टाइम को फीड कराया जाएगा। उपभोक्ताओं को इसकी डिलेवरी के दौरान हॉकरों को इसे अपडेट करना होगा। इस दौरान उपभोक्ता के घर की लोकेशन भी रिकार्ड होगी। इससे डिलेवरी की समय का पता चलेगा। अगर उसने गड़बड़ी करने की कोशिश की तो उसे आसानी से ट्रैस किया जा सकेगा।
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हालांकि, इस योजना को लेकर अभी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि एप को संचालित करने के लिए डिलेवरी मैन के पास एंड्रॉयड फोन का होना जरूरी है। जो कि अभी नहीं है। इंडियन ऑयल की ओर से डिलेवरी मैन को एंड्रॉयड फोन मुहैया कराए जाने की कोई योजना नहीं है। अब एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी कि वह डिलेवरी मैन को एंड्रॉयड फोन मुहैया कराएं।
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