फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Hari Giri said: Government should declare Sangam as world heritage before Mahakumbh, Juna Akhara associated wi

हरि गिरि बोले : महाकुंभ से पहले संगम को विश्व धरोहर घोषित कराए सरकार, अमर उजाला की मुहिम से जुड़ा जूना अखाड़ा

Fri, 06 Dec 2024 12:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 06 Dec 2024 12:20 PM IST
सार

पुराणों में कहा गया है कि त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं, 12वें वर्ष में कुंभ का और छठवें वर्ष में अर्धकुंभ का त्रिवेणी संगम पर विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम अद्भुत और अविस्मरणीय होता है। इसकी महिमा अपरंपार है।

विज्ञापन
Hari Giri said: Government should declare Sangam as world heritage before Mahakumbh, Juna Akhara associated wi
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि महाराज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में संगम को स्थान दिलाने की अमर उजाला की मुहिम से श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा भी जुड़ गया है। जूना अखाड़ा सभी 13 अखाड़ों में सबसे बड़ा है। इसमें 5.50 लाख से अधिक नागा संन्यासी हैं। अखाड़े के संरक्षक श्री महंत हरि गिरि ने कहा कि संगम विश्व की अनमोल धरोहर है। ऐसी त्रिवेणी न कहीं है औ न कहीं हो सकती है।

विज्ञापन


इसे संरक्षित करने के साथ ही धरोहर घोषित कराने के लिए जरूरत पड़ने पर संघर्ष भी किया जाएगा। जूना अखाड़े के संरक्षक ने कहा बताया कि संगम जैसी महिमा पृथ्वी पर किसी भी तीर्थ की नहीं है।संगम पर वेणीमाधव, सोमेश्वर, भरद्वाजेश्वर, नागवासुकि, अक्षयवट जैसे तीर्थों के दर्शन से जीवन धन्य हो जाता है।
विज्ञापन


पुराणों में कहा गया है कि त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं, 12वें वर्ष में कुंभ का और छठवें वर्ष में अर्धकुंभ का त्रिवेणी संगम पर विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम अद्भुत और अविस्मरणीय होता है। इसकी महिमा अपरंपार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


महंत हरि गिरि ने कहा कि इसी महाकुंभ में संगम को विश्व धरोहर घोषित कर दिया जाना चाहिए। 45 करोड़ से अधिक भक्तों के आने का अनुमान है। यह मेला सद्भाव, सौहार्द, सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। यह छुआछूत, जातीयता और सांप्रदायिकता से परे है। यह सहिष्णुता और मानवता की मिसाल है। इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया ही जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed