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हापुड़ लाठीचार्ज: गरीब याचियों के आंसुओं और दर्द से ज्यादा नहीं वकीलों की हड़ताल का वजन, हाईकोर्ट की टिप्पणी

Thu, 14 Sep 2023 07:55 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 14 Sep 2023 07:55 AM IST
सार

हापुड़ लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों के न्यायिक कार्य से विरत रहने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गरीब याचियों के आंसुओं और दर्द के वजन से ज्यादा हड़ताल नहीं है। बुधवार को भी वकीलों ने काम नहीं किया। इस पर न्यायमूर्तियों ने निराशा जताई।

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UP News: Allahabad High Court condemns Lawyers Strike Not Greater Than Tears and Pain Of Litigants
allahabad highcourt - फोटो : Prayagraj

विस्तार

हड़ताल का वजन निश्चित रूप से उन गरीब याचियों के आंसुओं और दर्द के वजन से ज्यादा नहीं हो सकता, जिन्होंने न्याय प्रणाली और न्याय की संस्था में पूरा विश्वास जताया है। हापुड़ लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों के न्यायिक कार्य से विरत रहने पर यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की है।
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उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के आह्वान पर बुधवार को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट, जिला अदालतों समेत अन्य न्यायिक संस्थानों में कामकाज नहीं हो सका। अधिवक्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस पर न्यायमूर्तियों ने सकारात्मक न्यायिक हस्तक्षेप के बावजूद हड़ताल जारी रखने पर निराशा जताई।
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कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के महानिबंधक ने मंगलवार से वर्चुअल मोड में सुनवाई के लिए ईमेल जारी किया था लेकिन अधिवक्ता शारीरिक या वर्चुअल मोड के जरिए उपस्थित ही नहीं हो रहे हैं। याची समाज के कमजोर वर्गों से हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। 
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उनकी शिकायतों और समस्याओं के सभ्य मानवीय समाधान और समान अवसर के लिए उनकी मौन पुकार न्याय की पुकार है। इसे न केवल न्यायाधीशों, बल्कि वकीलों द्वारा भी महसूस किया और सुना जा सकता है। दुर्भाग्यवश पैरवी नहीं हो रही है। चाहे जो भी कारण हो, निश्चित रूप से उन याचियों के आंसुओं और दर्द के वजन से अधिक वजन का नहीं हो सकता, जिन्होंने न्याय प्रणाली और न्याय की संस्था में पूरा विश्वास जताया है।
 

इसके पहले अधिवक्ता सुबह 10 बजे ही हाईकोर्ट प्रवेश द्वारों पर एकत्र हो गए और किसी को भी अंदर जाने नहीं दिया। इससे अधिवक्ता देर तक अंदर नहीं जा सके। अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति में कोर्ट नहीं बैठी। कोर्ट ने याचियों खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं किया है। 

 

कोर्ट ने अपने स्तर पर ही देखकर याचिकाओं का निस्तारण किया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सहित सभी बार एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। बुधवार को हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के एक गुट ने अनशन भी किया।
 

दोपहर बाद प्रवेशद्वार खुले तो अधिवक्ता अंदर जा सके लेकिन चैंबर्स बंद ही रहे। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह ने बैठक बुलाई। कहा कि 29 अगस्त की घटना के बावजूद सरकार की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। इस वजह से अधिवक्ताओं में रोष है।

 

अध्यक्ष ने कुछ सदस्यों द्वारा न्यायिक प्रस्ताव पारित किए जाने के निर्णय पर आपत्ति जताने पर नाराजगी जाहिर की। चेतावनी के स्वर में कहा कि बार के निर्णय का सम्मान करें। सभी बार का सहयोग करें। बैठक में महासचिव नितिन शर्मा, अरविंद कुमार श्रीवास्तव, स्वर्ण लता सुमन, सर्वेश कुमार दूबे, अजय सिंह आदि मौजूद रहे।

 

उधर, राजस्व बार परिषद के संयुक्त सचिव प्रेस सुरेंद्र कुमार और कैट बार एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र नायक ने बताया कि कामकाज नहीं हुआ।
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