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Court Room Live : मुस्लिम पक्ष ने कहा- सर्वे से ज्ञानवापी को होगा नुकसान, ASI ने खारिज की दलील

Wed, 26 Jul 2023 09:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 26 Jul 2023 09:58 PM IST
सार

Gyanvapi Survey : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की अदालत में बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे से ज्ञानवापी के सर्वे के विरोध में दाखिल मुस्लिम पक्ष की याचिका पर विधिवत सुनवाई शुरू हुई। याची अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के वकील एसएफए नकवी ने बहस शुरू होते ही कहा, देश ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस को झेला है।

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Gyanvapi Survey: Muslim side said - survey will harm Gyanvapi, ASI rejected the argument
ज्ञानवापी परिसर। - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में ज्ञानवापी के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के विरोध में दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्ष ने कहा कि जल्दबाजी में वैज्ञानिक सर्वे से ज्ञानवापी के मूल ढांचे को नुकसान होगा। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। एएसआई ने यह भी जोड़ा कि सर्वे का पांच फीसदी काम हो चुका है, कोर्ट की इजाजत मिली तो 31 जुलाई तक इसे पूरा कर लेंगे। कोर्ट ने सर्वे पर लगी रोक बढ़ाते हुए बृहस्पतिवार दोपहर साढ़े तीन बजे पुनः सुनवाई का निर्णय लिया है।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की अदालत में बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे से ज्ञानवापी के सर्वे के विरोध में दाखिल मुस्लिम पक्ष की याचिका पर विधिवत सुनवाई शुरू हुई। याची अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के वकील एसएफए नकवी ने बहस शुरू होते ही कहा, देश ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस को झेला है। अदालती आदेश की आड़ में होने वाले वैज्ञानिक सर्वे से ज्ञानवापी के मूल ढांचे को होने वाले नुकसान को रोकना जरूरी है।

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नकवी ने कहा कि ज्ञानवापी में बिना तोड़-फोड़ के सर्वेक्षण हाेना नामुमकिन है। कोर्ट के बुलावे पर हाजिर हुए एएसआई के अधिकारी ने मुस्लिम पक्ष की इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इससे रत्ती भर नुकसान नहीं होगा। एएसआई ने दावा किया कि ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) की अत्याधुनिक तकनीक से किसी भी तरह के नुकसान की आशंका नहीं है।

इसी तकनीक से कानपुर आईआईटी के भू-वैज्ञानिकों की टीम ने सर्वे किया है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हमारा मकसद ज्ञानवापी के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचाना नहीं है। हम उस ढांचे के नीचे छुपी सच्चाई को सामने लाना चाहते हैं। सर्वे से ही ज्ञानवापी की सच्चाई का पता चल सकता है।

मुस्लिम पक्ष ने एक दूसरा तर्क भी रखा। दलील दी, वाराणसी जिला अदालत में सुने गए सिविल वाद की पोषणीयता का बिंदु विचाराधीन रहते कोई भी आदेश न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। जरूरी है कि पहले इस विधिक प्रश्न को हल किया जाए। बगैर इसके सर्वेक्षण उचित नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के हलफनामे पर जवाब देने के लिए दो दिन का समय भी मांगा। हालांकि, करीब साढ़े चार घंटे तक हुए दावे-प्रतिदावे के बीच कोर्ट ने एएसआई के सर्वे पर लगी सुप्रीम रोक को बरकरार रखते हुए सुनवाई बृहस्पतिवार की दोपहर साढ़े तीन बजे नियत कर दी।

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कोर्ट ने तलब किए एएसआई के वैज्ञानिक, तीन घंटे रोकी सुनवाई

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह से पूछा कि एएसआई ज्ञानवापी में क्या करेगी और क्यों वहां जा रही है। यह भी सवाल किया कि एएसआई किस तरह से सर्वेक्षण करेगी। खोदाई करेगी या नहीं? शशि प्रकाश सिंह ने जवाब दिया कि एएसआई ही इस बारे में स्पष्ट जानकारी दे सकेगी।

इसके बाद कोर्ट ने करीब 12:45 बजे एएसआई के वैैज्ञानिकों को सर्वे के डेमो (प्रदर्शन) के लिए वाराणसी से तलब किया। उन्हें प्रयागराज आने के लिए तीन घंटे दिए गए। इस दौरान सुनवाई रुकी रही। वाराणसी से साढ़े चार बजे आनन-फानन में पहुंचे एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने उनसे पूछा कि न आप पक्षकार हैं, न आपको अदालती आदेश की प्रति तामील कराई गई तो आप पिक्चर में कैसे आ गए? उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन से मिली जानकारी के बाद सर्वेक्षण का काम शुरू किया था। यह दायित्वों के निर्वहन का हिस्सा था।

नुकसान की कौन लेगा गारंटी: नकवी
 

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के वकील एसएफए नकवी ने कहा 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस का दंश देश ने झेला है। उसके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लिहाजा, इस संवेदनशील मामले में भी अफरा-तफरी में कोई भी फैसला लिया जाना उचित नहीं है। फिर, काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और इंतजामिया के बीच कोई विवाद भी नहीं है, इसलिए महिलाओं का वाद दाखिल करने का कोई विधिक अधिकार नहीं बनता।

उन्होंने एएसआई को पक्षकार भी नहीं बनाया है। नकवी ने कहा कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण को लेकर एएसआई की अति सक्रियता मन में संदेह पैदा करने वाली है। आशंका है कि असामयिक अदालती आदेश पर होने वाले वैज्ञानिक सर्वेक्षण से ज्ञानवापी परिसर में खोदाई की जाएगी और मूल ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। सवाल किया कि इससे होने वाले नुकसान की गारंटी कौन लेगा?

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