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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Gyanvapi case: 354-year-old case settled in three minutes, eyes of the whole country were on

ज्ञानवापी केस : तीन मिनट में 354 साल पुराने विवाद की हकीकत जानने का रास्ता साफ, टिकी थीं पूरे देश की निगाहें

Fri, 04 Aug 2023 12:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 04 Aug 2023 12:24 PM IST
सार

हाईकोर्ट के समक्ष यह प्रकरण 25 जुलाई को ही आया था। ज्ञानवापी का सर्वे रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची अंजुमन इंतजामिया मसाजिद को 26 जुलाई तक ही राहत मिली थी। अंजुमन को कहा गया था कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी बात कहें।

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Gyanvapi case: 354-year-old case settled in three minutes, eyes of the whole country were on
इलाहाबाद हाईकोर्ट में ज्ञानवापी केस की सुनवाई। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बहुचर्चित ज्ञानवापी प्रकरण से जुड़े फैसले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पर बृहस्पतिवार को सभी की निगाहें टिकी थीं। उम्मीद थी कि वैज्ञानिक सर्वे को लेकर फैसला दोपहर बाद ही आएगा। रवायत भी यही है कि कोर्ट पहले ताजा मामले सुने और दोपहर बाद फैसलों में लगे मामले निपटाए। मगर, आज कुछ खास होने वाला था। घड़ी ने 10 बजाए ही थे कि मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर कोर्ट रूम पहुंचे और तीन मिनट में फैसला सुनाकर 354 साल पुराने मामले की सच्चाई जानने का रास्ता साफ कर दिया।

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हालांकि, हाईकोर्ट के समक्ष यह प्रकरण 25 जुलाई को ही आया था। ज्ञानवापी का सर्वे रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची अंजुमन इंतजामिया मसाजिद को 26 जुलाई तक ही राहत मिली थी। अंजुमन को कहा गया था कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी बात कहें। इसके बाद यहां सुनवाई शुरू हुई। मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की पीठ ने खुद इस मामले को सुनने का निर्णय लिया।

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मुख्य न्यायाधीश की अदालत में तीन दिन तक जबरदस्त दावे-प्रतिदावे का दौर चला। एएसआई के वैज्ञानिक तलब किए गए। सर्वे की तकनीक पर भी खूब चर्चा हुई। अदालत जब मुतमईन हो गई कि ज्ञानवापी के नीचे मंदिर के छुपे होने-न होने की सच्चाई को जानने में उस जीपीआर तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिसमें किसी तरह की कोई क्षति नहीं होगी तो इसका फैसला तीन अगस्त के लिए मुकर्रर कर दिया।

बृहस्पतिवार को सुबह से ही कोर्ट परिसर में गहमा-गहमी थी। आम लोगों में ही नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं में भी इसे लेकर सुबह से कयासबाजी हो रही थी। सबको लग रहा था कि अदालत दोपहर बाद ही इसका फैसला सुनाएगी। लेकिन, मुख्य न्यायाधीश ने ठीक 10 बजे कोर्ट रूम पहुंचकर इस ऐतिहासिक फैसले को सुना दिया। 16 पेज के फैसले को सुनाने में उन्हें सिर्फ तीन मिनट लगे। इसके साथ सदियों पुराने विवाद को निपटाने की उम्मीद की एक दीया भी रोशन हो गया।

ज्ञानवापी मामले में मूक दर्शक बन नहीं बैठेगी अदालत-मुख्य न्यायाधीश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विवादित मुद्दे को हल करने के लिए अदालत मूक दर्शक नहीं बन सकती है। न्यायहित में मामले की सच्चाई की तह तक जाने के लिए अदालत किसी भी स्तर पर जांच का आदेश देने को स्वतंत्र है।यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने ज्ञानवापी के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए अपने सोलह पन्ने के निर्णय में की है।

मुस्लिम पक्ष के वकील एसएफए नकवी ने बहस के दौरान अपनी दलील में कहा था कि हिंदू पक्षकार का दावा साक्ष्य विहीन है। वादी के दावे को साबित करने के लिए अदालत साक्ष्य संकलन का कार्य नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम की ओर से पेश की गई नजीरें उनकी सहायता नहीं करती है। क्योंकि कोर्ट मूक दर्शक नहीं है। किसी मामले की सच्चाई जानने की दिशा में कोर्ट के आदेश से हाेने वाली जांच, साक्ष्य संकलन नहीं है।

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