जीत के बाद बोलीं गुरजीत, उम्मीद नहीं थी, इतना सटीक लगेगा ड्रैग फ्लिक
- शुरूआती तीन मैच में मिली हार के बाद निराश हो गईं थी गुरजीत और निशा
- अब चार अगस्त को अर्जेंटीना के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल मैच पर पूरा फोकस
विस्तार
टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में तीन बार की गोल्ड मेडलिस्ट आस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक गोल कर भारतीय हॉकी खिलाड़ी गुरजीत कौर ने इतिहास रच दिया। भारतीय महिला टीम को पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचाने वाली गुरजीत को विश्वास ही नहीं था कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका ड्रैग फ्लिक इतना सटीक लगेगा। मैच जीतने के बाद गुरजीत ने कहा कि उनका अब पूरा फोकस चार अगस्त को अर्जेंटीना के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल मैच पर है।
प्रयागराज के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में सीनियर क्लर्क के पद कार्यरत हॉकी खिलाड़ी गुरजीत कौर और निशा ने मैच जीतने के बाद वीडियो काल से रेलवे की कोच और प्रयागराज हॉकी एसोसिएशन की सचिव पुष्पा श्रीवास्तव से बात की। पुष्पा ने बताया कि इस दौरान इन दोनों ही खिलाड़ियों की खुशी देखने लायक थी। गुरजीत ने इस दौरान उनसे कहा कि मैम मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरा ड्रैग फ्लिक इतना सटीक लग गया। पुष्पा बताती है कि गुरजीत शुरू से ही बड़े मैचों में बेहतर प्रदर्शन करते आ रही हैं।
यह बात सही है कि शुरूआत के तीन मैच हार जाने के भारतीय खिलाड़ी थोड़ी निराश जरूर थी। इस दौरान गुरजीत से व्हाट्सअप चैटिंग हुई थी। तब गुरजीत और निशा से सिर्फ यही कहा गया कि वह अपना गेम खेले। वह भूल जाए कि भारत लगातार तीन मैच हार गया है।
इसके बाद आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमारी लड़कियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। महिला टीम की ये जीत बेहद चौंकाने वाली है, क्योंकि 1980 के बाद भारतीय टीम सिर्फ 2016 में रियो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर पाई थी। 2016 में भी टीम 12वें स्थान पर रही थी। लेकिन अब इस जीत ने यह तय कर दिया कि देश की लड़कियां किसी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं। गुरजीत के साथ एनसीआर हॉकी टीम की सदस्य निहारिका सक्सेना ने बताया कि गुरजीत बहुत ही अच्छी डिफेंडर हैं। ड्रैग फ्लिक में तो उनका कोई जवाब ही नहीं।
प्रयागराज की गुरजीत के लिए बेहद लकी है अगस्त माह
गुरजीत के लिए अगस्त माह बेहद लकी साबित हुआ है। सोमवार को गुरजीत ने जहां टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में तीन बार की गोल्ड मेडलिस्ट ऑस्ट्रेलिया को हराकर देश को पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचाया, तो वहीं इसके पूर्व अगस्त 2018 में आयोजित एशियाड के सेमीफाइनल में भी उन्होंने चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ एकमात्र गोल कर भारत को फाइनल मैच में पहुंचाया था। टोक्यो ओलंपिक और उसके पूर्व एशियाड के सेमीफाइनल मैच की खास बात यह रही कि इन दोनों ही मैच में गुरजीत ने ड्रैग फ्लिक के जरिए गोल किया। एनसीआर में उनकी साथी एवं हॉकी प्लेयर दीक्षा तिवारी ने बताया कि मैच देखने के बाद खुशी के मारे आज आंख में आंसू आ गए। आज जो खुशी मिली उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता
डीआरएम ऑफिसमें रहा जश्न का माहौल
सोमवार को गुरजीत द्वारा किए गए निर्णायक गोल के बाद उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय से लेकर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय तक जश्न का माहौल बन गया। एनसीआर के नवनियुक्त महाप्रबंधक प्रमोद कुमार और डीआरएम प्रयागराज मोहित चंद्रा ने सेल्फी प्वाइंट पर फोटो खिंचवा कर टीम इंडिया का उत्साह बढ़ाया। इस बीच डीआरएम ऑफिस में तमाम अधिकारी/ कर्मचारी गुरजीत की वर्किंग टेबल के पास जमा हो गए और जश्न मनाया। अंतर्राष्ट्रीय वॉकर रह चुके सीआईटी डोरी लाल शर्मा ने कहा कि गुरजीत और निशा की जुगलबंदी ने पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में भारतीय टीम को पहुंचाया।
ओलंपिक के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद सोशल मीडिया में दिन भर बधाइयों का दौर चला। कई लोग चक दे इंडिया के कैप्शन के साथ इंडियन विमेंस टीम की तस्वीर शेयर करते रहे। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी टीम इंडिया को ट्वीट कर बधाई दी। एक यूजर्स ने लिखा ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम इस ओलिंपिक में सबसे मजबूत डिफेंस वाली टीम रही है। उसने पूल स्टेज के पांच मैचों में सिर्फ एक गोल खाया। वहीं, उसकी ओर से 13 गोल हुए। दूसरी ओर भारतीय टीम पूल स्टेज में 14 गोल खा चुकी थी और गोल किए थे सिर्फ सात।
ड्रैग फ्लिक से बदला गुरजीतका करियर
गुरजीत के स्पोर्ट्स करियर में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट ड्रैग फ्लिक ही है। इस तकनीक से गुरजीत को भारतीय हॉकी टीम में एक अलग पहचान मिली है। रेलवे में उनकी कोच पुष्पा श्रीवास्तव बताती है कि अपनी टीम के लिए एक अच्छी ड्रैग फ्लिकर बनने के लिए गुरजीत लगातार अभ्यास करती रहती हैं। पंजाब के अमृतसर जिले की निवासी गुरजीत जूनियर नेशनल कैंप से जुड़ने से पहले वह ड्रैग फ्लिकिंग की कला से खास अवगत नहीं थी। वर्ष 2012 जूनियर कैंप से जुड़ने के बाद उसने ड्रैग फ्लिकिंग का हुनर सीखा। इसी वजह से अधिकांश पेनाल्टी कार्नर में गुरजीत को ही मौका मिलता है।
हम सभी के लिए यह गर्व का क्षण है। हम कामना करते हैं कि भारतीय टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे और देश का नाम रोशन करें। -प्रमोद कुमार, जीएम, एनसीआर।
गुरजीत कौरने रेलवे परिवारके साथ ही देश कोगौरवान्वित किया है।हम आगे के मैचों केलिए टीम को शुभकामनाएं देते हैं। - मोहित चंद्रा, डीआरएम प्रयागराज।