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गुमान से इठलाता चला ‘गुजराती मोदी मुगदर’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:54 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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रंगभरी एकादशी से भी पहले दारागंज में होली ने दस्तक दी। रविवार को पूरी शान-शौकत से ‘गुजराती मोदी मुगदर’ की बारात निकाली गई। धकाधक संस्थान की ओर से धकाधक चौराहे के करीब प्रयागराज सेवा समिति के कार्यालय से बैंडबाजा, गदा, फरसा आदि के साथ धूम से निकली बारात डॉ.प्रभात शास्त्री मार्ग से निराला चौराहे पर पहुंची तो हुजूम उमड़ा पड़ा। बारात में ढोल, ताशा, पंजाबी बैंड, घोड़ों के साथ ही स्वच्छता अभियान का संदेश देती झांकियां भी शामिल थीं।
निराला चौक पर ही संयोजक तीर्थराज पांडेय ‘बच्चा भइया’ ने यह कहते हुए कि यह मुगदर संगम को विश्व धरोहर दर्ज कराने, कुंभ के लिए सभी को आमंत्रित करने और पाक को सबक सिखाने के लिए मैदान में लाया गया है, प्रतियोगिता के लिए ललकार लगाई। स्थानीय पहलवानों सहित कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर आदि जिलों से पहुंचे पहलवानों ने मुगदर भांजने के लिए नामांकन कराया। जुटे पहलवानों ने मुगदर भांजने के लिए जोर आजमाइश की लेकिन कोई भी 151 बार मुगदर भांजने की शर्त नहीं पूरी कर सका। पांच निर्णायकों में से तीन कवि और दो पहलवान थे।
बारात से पहले मुगदर द्वारा नीबू और नारियल से बलि दी गई। पुष्पराज पांडेय, योगराज पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई, फिर फूलों से सजे रथ पर मुगदर को सवार कराया गया। आरंभ में कवियों ने रचनापाठ करते हुए हास्य और व्यंग्य की बौछार की। धर्मराज पांडेय ने उद्घाटन और डॉ.शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल ने संचालन और विष्णु दयाल श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समापन से पूर्व सभी पहलवानों और कवियों को प्रयागराज सेवा समिति की ओर से ‘शगुन गौरव सम्मान’ से नवाजा गया। बारात में फूलचंद्र दुबे, राजेंद्र तिवारी दुकानजी, डीआर पांडेय, मोहम्मद अकरम, जितेंद्र गौड़, शक्तिराज, राजू, अशोक, आशुतोष, रविराज आदि शामिल थे।
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निराला चौक पर ही संयोजक तीर्थराज पांडेय ‘बच्चा भइया’ ने यह कहते हुए कि यह मुगदर संगम को विश्व धरोहर दर्ज कराने, कुंभ के लिए सभी को आमंत्रित करने और पाक को सबक सिखाने के लिए मैदान में लाया गया है, प्रतियोगिता के लिए ललकार लगाई। स्थानीय पहलवानों सहित कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर आदि जिलों से पहुंचे पहलवानों ने मुगदर भांजने के लिए नामांकन कराया। जुटे पहलवानों ने मुगदर भांजने के लिए जोर आजमाइश की लेकिन कोई भी 151 बार मुगदर भांजने की शर्त नहीं पूरी कर सका। पांच निर्णायकों में से तीन कवि और दो पहलवान थे।
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बारात से पहले मुगदर द्वारा नीबू और नारियल से बलि दी गई। पुष्पराज पांडेय, योगराज पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई, फिर फूलों से सजे रथ पर मुगदर को सवार कराया गया। आरंभ में कवियों ने रचनापाठ करते हुए हास्य और व्यंग्य की बौछार की। धर्मराज पांडेय ने उद्घाटन और डॉ.शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल ने संचालन और विष्णु दयाल श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समापन से पूर्व सभी पहलवानों और कवियों को प्रयागराज सेवा समिति की ओर से ‘शगुन गौरव सम्मान’ से नवाजा गया। बारात में फूलचंद्र दुबे, राजेंद्र तिवारी दुकानजी, डीआर पांडेय, मोहम्मद अकरम, जितेंद्र गौड़, शक्तिराज, राजू, अशोक, आशुतोष, रविराज आदि शामिल थे।
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