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गार्ड और ड्राइवर की नहीं होगी बायोमीट्रिक अटेंडेंस
Sat, 28 Mar 2020 12:47 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 28 Mar 2020 12:47 AM IST
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कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने सभी लोको पायलट और गार्ड की बायोमीट्रिक अटेंडेंस पर रोक लगा दी है। इसके अलावा उन्होंने ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट पर भी अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया है।
कहा, रेलकर्मी चाहें तो स्वेच्छा से यह टेस्ट करवा सकते हैं। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से महाप्रबंधक ने कहा कि रेलवे के सभी आवश्यक कार्यों में स्वच्छता और सामाजिक दूरी का प्रोटोकॉल पहले से ही बहुत सख्ती से लागू है। इससे आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने अब लॉबी में चालक दल और गार्ड के साइन-ऑन/ऑफ से संबंधित नियमों में परिवर्तन किया है।
विभिन्न लोगों द्वारा टच किए जाने से बचाव के लिए क्रू मैनेजमेंट सिस्टम पर कर्मचारियों का विवरण डेटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा फीड किया जाएगा और श्वांस परीक्षण टेस्ट (ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट) भी वैकल्पिक कर दिया गया है। यदि लॉकडाउन अवधि तक कोई भी चालक दल श्वांस परीक्षण टेस्ट देने के लिए तैयार नहीं है, तो उसे स्व-घोषणा के आधार पर ट्रेन चलाने की अनुमति होगी। हालांकि, यह सुविधा उन्हीं चालक दल के लिए उपलब्ध होगी, जिनका कोई एल्कोहलिक इतिहास नहीं है।
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जीएम ने कहा कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार होने के क्रम में, रेलवे कम से कम संशोधन के साथ रेलवे डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड के रूप में उपयोग करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। इसके लिए ट्रायल कोच को कोचिंग डिपो दिल्ली में संशोधित किया जा रहा है। यह कोच 28 मार्च तक तैयार होने की उम्मीद है।
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कहा, रेलकर्मी चाहें तो स्वेच्छा से यह टेस्ट करवा सकते हैं। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से महाप्रबंधक ने कहा कि रेलवे के सभी आवश्यक कार्यों में स्वच्छता और सामाजिक दूरी का प्रोटोकॉल पहले से ही बहुत सख्ती से लागू है। इससे आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने अब लॉबी में चालक दल और गार्ड के साइन-ऑन/ऑफ से संबंधित नियमों में परिवर्तन किया है।
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विभिन्न लोगों द्वारा टच किए जाने से बचाव के लिए क्रू मैनेजमेंट सिस्टम पर कर्मचारियों का विवरण डेटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा फीड किया जाएगा और श्वांस परीक्षण टेस्ट (ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट) भी वैकल्पिक कर दिया गया है। यदि लॉकडाउन अवधि तक कोई भी चालक दल श्वांस परीक्षण टेस्ट देने के लिए तैयार नहीं है, तो उसे स्व-घोषणा के आधार पर ट्रेन चलाने की अनुमति होगी। हालांकि, यह सुविधा उन्हीं चालक दल के लिए उपलब्ध होगी, जिनका कोई एल्कोहलिक इतिहास नहीं है।
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जीएम ने कहा कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार होने के क्रम में, रेलवे कम से कम संशोधन के साथ रेलवे डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड के रूप में उपयोग करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। इसके लिए ट्रायल कोच को कोचिंग डिपो दिल्ली में संशोधित किया जा रहा है। यह कोच 28 मार्च तक तैयार होने की उम्मीद है।