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High Court : एडहॉक, नियमित सेवा को जोड़कर ग्रेच्युटी व अन्य लाभ दिया जाए, कोर्ट ने शिक्षा विभाग को दिया आदेश

Thu, 22 Aug 2024 01:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 22 Aug 2024 01:07 PM IST
सार

सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज स्थित आदर्श इंटर कॉलेज में वर्ष 1988 में याची के पति कलंदर त्रिपाठी एडहॉक पर सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। 1998 में वह नियमित हो गए। इस दौरान 2012 में 56 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। याची ने पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य परिलाभों के लिए आवेदन किया।

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Gratuity and other benefits should be given by combining adhoc and regular service
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा में एडहॉक, नियमित सेवा को जोड़कर ही ग्रेच्युटी व अन्य लाभ दिया जाए। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने श्यामा देवी की याचिका पर अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर यह आदेश दिया।

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सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज स्थित आदर्श इंटर कॉलेज में वर्ष 1988 में याची के पति कलंदर त्रिपाठी एडहॉक पर सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। 1998 में वह नियमित हो गए। इस दौरान 2012 में 56 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। याची ने पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य परिलाभों के लिए आवेदन किया। मंडलीय उप शिक्षा निदेशक विंध्याचल मंडल मिर्जापुर ने आवेदन खारिज कर दिया। कहा कि एक मार्च 2021 के शासनादेश के अनुसार याची की पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा उसके नियमित होने की तिथि से जोड़ी जाएगी। इस आधार पर याची के पति की कुल 14 वर्ष की सेवा होती है, जो की ग्रेच्युटी के लिए अर्हकारी नहीं है।
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वकील ने दलील दी कि एक मार्च 2021 का शासनादेश याची पर लागू नहीं होगा। याची के पति की कुल सेवा एडहॉक और नियमित मिलाकर 23 वर्ष तीन माह होती है। इसलिए वह ग्रेच्युटी के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त संस्थान के कर्मचारियों की पेंशन नियमावली 1964 के अनुसार एडहॉक और नियमित सेवा को जोड़कर अर्हकारी सेवा मानी जाएगी। इसमें बाद में किया गया संशोधन लागू नहीं होगा। क्योंकि, याची के अधिकार पूर्व के नियम से सृजित हो चुके हैं। इसलिए उसे बाद के किसी संशोधन से समाप्त नहीं किया जा सकता है।

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