राज्यपाल ने कहा : असफलताओं से सीखें, छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव लाएं, युवाओं को नशे से बचाएं
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षाविदों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। विश्वविद्यालयों में बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करने, विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को नशे से बचाने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी पर निर्भर है।
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राज्यपाल ने कहा कि सफलता का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। पहली ही कोशिश में सफलता मिल जाए, यह जरूरी नहीं है। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। निरंतर सवाल पूछने, सोचने और समस्याओं का समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। समस्या की सही पहचान हो जाए तो उसका समाधान निकालना आसान हो जाता है। विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षकों को भी इसी सोच के साथ काम करना होगा। प्रदेश के 50 लाख से अधिक विद्यार्थी राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, इसलिए उनके भविष्य को संवारने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की है। राज्यपाल ने यह बातें बुधवार को प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया राज्य विश्वविद्यालय में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन में कहीं।
राज्यपाल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से ऋण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं अपने परिवार और बेटियों के भविष्य को बेहतर बना रही हैं। एक महिला ने ऋण लेकर अपनी बेटियों को विदेश में पढ़ने भेजा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है। बिजली बिल वसूली जैसे कार्यों में भी महिलाओं को अवसर देकर करीब 80 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की गई है। परंपरागत कारीगरों और शिल्प से जुड़े लोगों को भी प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सीखने की ललक हमेशा बनी रहनी चाहिए। खुद पढ़ने, लोगों से चर्चा करने और नई जानकारियां हासिल करने से ही अपनी कमियों और संभावनाओं का पता चलता है। अधिकारियों और शिक्षकों को अपनी क्षमता पहचाननी होगी तथा नीतियों और नियमों के अनुसार पूरी जिम्मेदारी से काम करना होगा। नौकरी को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूर्णकालिक जिम्मेदारी मानकर चलना चाहिए। कार्यसंस्कृति में सुधार के लिए समयबद्धता और नियमितता जरूरी है।
छोटे प्रयासों से विश्वविद्यालयों में आएगा बड़ा बदलाव
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिसर में हंगामे और विवाद की स्थिति बनने से पहले विद्यार्थियों की बात सुनी जानी चाहिए। उनकी समस्याओं को समझकर समाधान का रास्ता निकालना कुलपतियों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है। इसके लिए बड़े भवन या बड़े बजट की आवश्यकता नहीं है। एक छोटे कमरे में भी किसी विषय पर विचार-विमर्श शुरू किया जा सकता है।
चार विद्यार्थियों और दो शिक्षकों को जोड़कर छोटी पहल कीजिए। धीरे-धीरे यही प्रयास बड़े केंद्र का रूप ले सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में आपसी संवाद बढ़ाने की जरूरत बताई। कहा कि केवल औपचारिक बैठकों से काम नहीं चलेगा। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिकारियों के बीच नियमित बातचीत होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाए और विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएं।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार करें, मूल्यांकन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास होने चाहिए। बार-बार परीक्षा देने और अनावश्यक रूप से बैक लगने की समस्या का भी समाधान किया जाना चाहिए। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। शिक्षक यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थियों ने जो उत्तर लिखा है, उसका सही आकलन किया जाए।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछना विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। ऐसा किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। प्रश्नपत्र तैयार करने में भी सावधानी बरती जाए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए शिक्षकों को भी अपनी कार्यप्रणाली और दक्षता में लगातार सुधार करना होगा। मूल्यांकन में लापरवाही करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
युवाओं को नशे से बचाने के लिए कॉलेजों में चलाएं अभियान
राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। केवल युवाओं को सलाह देना पर्याप्त नहीं है, शिक्षकों और जिम्मेदार लोगों को भी अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। नशे की समस्या को समझने के लिए यह भी देखना होगा कि युवाओं तक नशीले पदार्थ किस तरह पहुंच रहे हैं और इसके पीछे कौन-से कारण हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई क्षेत्रों में गंभीर समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से किया गया है। इसी तरह नशे की समस्या से निपटने के लिए भी सरकार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर काम करना होगा।
जातिगत विभाजन से ऊपर उठें शिक्षित लोग
राज्यपाल ने कहा कि पढ़े-लिखे लोगों का भी जातियों में बंटना चिंताजनक है। शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और बेहतर बनाना है, न कि विभाजन को बढ़ावा देना। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में सामाजिक समरसता, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कुलपतियों से कहा कि विश्वविद्यालय की हर गतिविधि और समस्या की जानकारी रखना उनकी जिम्मेदारी है। केवल पद पर बैठने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि उन्हें स्वयं पहल करनी होगी। प्रदेश के विकास में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका है। उत्तर प्रदेश का भविष्य संवारने की बड़ी जिम्मेदारी शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथों में है।
साफ-सफाई और व्यवस्था सुधारने की शुरुआत खुद से करें
राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार जनभवन में अवकाश के दिन उन्होंने परिसर के एक कमरे का निरीक्षण किया। वहां पुराने और अनुपयोगी सामान, टूटे झाड़ू, बाल्टियां और कई वर्षों से रखे बड़े-बड़े बक्से भरे हुए थे। एक बक्से में पुराना मोबाइल भी करीने से पैक करके रखा गया था। उन्होंने कहा कि यह देखकर सवाल उठा कि आखिर कमरों में इतना अनुपयोगी सामान क्यों जमा है और वर्षों से उसे हटाया क्यों नहीं गया।
इसके बाद संबंधित लोगों को समझाकर कमरों को खाली कराने और व्यवस्था सुधारने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होगी। जब जिम्मेदार लोग स्वयं झाड़ू उठाएंगे और सफाई की पहल करेंगे, तभी दूसरे लोग भी प्रेरित होंगे। केवल निर्देश देने से व्यवस्था नहीं बदलती, बल्कि खुद उदाहरण प्रस्तुत करना पड़ता है। उन्होंने छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और क्षमता देश का गौरव बढ़ाएगी। बेटियां अपनी उपलब्धियों से भारत का नाम रोशन करेंगी और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।