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पंजाब में नशा खत्म करने की समयसीमा पर राहुल का तंज: सुधांशु का पलटवार- संकल्प की ताकत समझिए; विवाद क्यों?
Wed, 04 Nov 2026 08:11 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 04 Nov 2026 08:11 PM IST
सार
पंजाब में नशे के खिलाफ तीन साल में कार्रवाई के केंद्र सरकार के वादे पर राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर भाजपा ने पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल के बयान को निराशा से उपजा बताते हुए उनके राजनीतिक नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी को बहस की चुनौती देने पर भी सवाल उठाए।
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सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पंजाब में नशे की समस्या खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की समयसीमा पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी को भाजपा ने जवाब दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को कहा कि राहुल गांधी को न तो संकल्प की ताकत का अंदाजा है और न ही उसे पूरा करने की क्षमता का। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बारे में पंजाब में राहुल ने एक बार फिर बेबुनियाद बातें की हैं।
उन्होंने आगे कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को खत्म करने का वादा किया था। न केवल नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ा है बल्कि 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक साल तक किसी भी सीआरपीएफ जवान की जान नहीं गई है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कहते थे कि देश से आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त करना संभव ही नहीं है। आज भारत आतंकवाद को नियंत्रित करने में सफल हो गया है। जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों को छोड़ दें तो पूरे भारत से आतंकवाद लगभग समाप्त हो चुका है।
अमित शाह के तीन साल के वादे पर क्या बोले थे राहुल?
दरअसल, राहुल गांधी ने संगरूर में कांग्रेस की 'इंसाफ रैली' के दौरान पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था। उन्होंने अमित शाह के तीन साल में पंजाब से नशा खत्म करने के वादे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा केंद्र सरकार एक साल भी टिक पाएगी। राहुल ने कहा था कि तीन साल बाद अमित शाह गृह मंत्री भी नहीं रहेंगे।
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पीएम मोदी को बहस की चुनौती देने पर त्रिवेदी का पलटवार
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद के बाहर आमने-सामने बहस की चुनौती भी दी थी। उन्होंने दावा किया था कि पांच मिनट की बहस में वह साबित कर देंगे कि प्रधानमंत्री देशद्रोही हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन्हें नियंत्रित करते हैं। इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नरेंद्र मोदी पिछले 12 साल से एनडीए के सर्वसम्मत नेता हैं, जबकि राहुल गांधी विपक्षी गठबंधन के भी नेता नहीं हैं। उन्होंने राहुल को संसद में आयोजित मॉक पार्लियामेंट में ही मॉक डिबेट करने की सलाह दी।
यह भी पढ़ें: 8वें वेतन आयोग का एक साल: क्या ₹25000 की पेंशन हो जाएगी ₹87500? जानें फिटमेंट फैक्टर पर अब तक क्या है अपडेट
संसद में बहस से पीछे हटने का लगाया आरोप
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने संसद को बहस का सर्वोच्च मंच बनाया है। ऐसे में विपक्ष के नेता का संसद के बाहर बहस की मांग करना संसदीय परंपराओं का अपमान है। उन्होंने दावा किया कि अविश्वास प्रस्ताव और मणिपुर पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री के बोलने पर राहुल सदन से बाहर चले गए थे।
एलआईसी, एसबीआई और एचएएल का भी किया जिक्र
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी कई भविष्यवाणियां गलत साबित हुई हैं। उन्होंने एलआईसी, भारतीय स्टेट बैंक और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ये संस्थान आज रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहे हैं। त्रिवेदी ने आतंकवाद और टीकों को लेकर राहुल के पुराने दावों पर भी सवाल उठाए।
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के पंजाब दौरे के दौरान हुए विरोध का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी जब परविंदर सिंह के घर जाने की कोशिश कर रहे थे, तब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। त्रिवेदी के मुताबिक, लोगों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने एक नवंबर को हुई राहुल की रैली को भी विफल बताया।
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उन्होंने आगे कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को खत्म करने का वादा किया था। न केवल नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ा है बल्कि 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक साल तक किसी भी सीआरपीएफ जवान की जान नहीं गई है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कहते थे कि देश से आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त करना संभव ही नहीं है। आज भारत आतंकवाद को नियंत्रित करने में सफल हो गया है। जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों को छोड़ दें तो पूरे भारत से आतंकवाद लगभग समाप्त हो चुका है।
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अमित शाह के तीन साल के वादे पर क्या बोले थे राहुल?
दरअसल, राहुल गांधी ने संगरूर में कांग्रेस की 'इंसाफ रैली' के दौरान पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था। उन्होंने अमित शाह के तीन साल में पंजाब से नशा खत्म करने के वादे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा केंद्र सरकार एक साल भी टिक पाएगी। राहुल ने कहा था कि तीन साल बाद अमित शाह गृह मंत्री भी नहीं रहेंगे।
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पीएम मोदी को बहस की चुनौती देने पर त्रिवेदी का पलटवार
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद के बाहर आमने-सामने बहस की चुनौती भी दी थी। उन्होंने दावा किया था कि पांच मिनट की बहस में वह साबित कर देंगे कि प्रधानमंत्री देशद्रोही हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन्हें नियंत्रित करते हैं। इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नरेंद्र मोदी पिछले 12 साल से एनडीए के सर्वसम्मत नेता हैं, जबकि राहुल गांधी विपक्षी गठबंधन के भी नेता नहीं हैं। उन्होंने राहुल को संसद में आयोजित मॉक पार्लियामेंट में ही मॉक डिबेट करने की सलाह दी।
यह भी पढ़ें: 8वें वेतन आयोग का एक साल: क्या ₹25000 की पेंशन हो जाएगी ₹87500? जानें फिटमेंट फैक्टर पर अब तक क्या है अपडेट
संसद में बहस से पीछे हटने का लगाया आरोप
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने संसद को बहस का सर्वोच्च मंच बनाया है। ऐसे में विपक्ष के नेता का संसद के बाहर बहस की मांग करना संसदीय परंपराओं का अपमान है। उन्होंने दावा किया कि अविश्वास प्रस्ताव और मणिपुर पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री के बोलने पर राहुल सदन से बाहर चले गए थे।
एलआईसी, एसबीआई और एचएएल का भी किया जिक्र
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी कई भविष्यवाणियां गलत साबित हुई हैं। उन्होंने एलआईसी, भारतीय स्टेट बैंक और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ये संस्थान आज रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहे हैं। त्रिवेदी ने आतंकवाद और टीकों को लेकर राहुल के पुराने दावों पर भी सवाल उठाए।
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के पंजाब दौरे के दौरान हुए विरोध का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी जब परविंदर सिंह के घर जाने की कोशिश कर रहे थे, तब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। त्रिवेदी के मुताबिक, लोगों ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने एक नवंबर को हुई राहुल की रैली को भी विफल बताया।