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हाईकोर्ट ने कहा : सभी कर्मचारियों को समान समझ निष्पक्ष कार्य करे सरकार, भेदभाव करना शक्ति का दुरुपयोग

Sat, 13 May 2023 02:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 13 May 2023 02:49 PM IST
सार

कोर्ट ने जिलाधिकारी गोरखपुर को संग्रह चपरासी याची को उससे जूनियरों को नियमित करने की तारीख 30 सितंबर 1989 से नियमित मानकर 10 फीसदी ब्याज सहित सभी सेवा जनित परिलाभों का तीन माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है। 

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Government should do fair work considering all employees as equal, discrimination is misuse of power
Court Room - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह सभी कर्मचारियों को समान समझ निष्पक्ष रूप से कार्य करेगी। जूनियर को सीनियर कर्मचारी से पहले नियमित करना मनमाना एवं अनुच्छेद 14 के तहत समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन है तथा शक्ति का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा विभाग अपनी स्वयं की गलती का लाभ नहीं उठा सकता।

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कोर्ट ने जिलाधिकारी गोरखपुर को संग्रह चपरासी याची को उससे जूनियरों को नियमित करने की तारीख 30 सितंबर 1989 से नियमित मानकर 10 फीसदी ब्याज सहित सभी सेवा जनित परिलाभों का तीन माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने रामानंद गुप्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

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याची का कहना था कि याची को एक जनवरी 79 को सीजनल संग्रह चपरासी नियुक्त किया गया। जबकि, विपक्षियों को इसके बाद नियुक्त किया गया किंतु उन्हें 1989 में नियमित कर लिया गया और याची को कोर्ट के आदेश पर 26 अक्तूबर 2017 को नियमित किया गया। उसने अपने से जूनियर कर्मचारियों को नियमित करने की तिथि से उसे भी नियमित मानने की अर्जी दी।

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जिसे तय करने का कोर्ट ने निर्देश दिया तो जिलाधिकारी ने यह कहते हुए मांग अस्वीकार कर दी कि याची के साथ कोई भी उससे जूनियर कर्मचारी नियमित नहीं किया गया। याची को नियमित करते समय उसकी आयु 45 वर्ष की थी। सरकार से आयु में छूट के बाद उसे नियमित किया गया और वह 31 अक्तूबर 18 को सेवानिवृत्त हो चुका है। उसकी सेवा दस साल से कम है। इसलिए उसे पेंशन पाने का अधिकार नहीं है।

कहा गया कि सरकार नियमित करने में कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं कर सकती। जूनियर से पहले उसे नियमित किया जाना चाहिए था। इसलिए उससे जूनियर जिस तारीख को नियमित किए गए हैं उसी तारीख से याची को भी नियमित माना जाए।

कोर्ट ने कहा याची को नियमित न कर जूनियर को नियमित करने की अपनी गलती का लाभ सरकार नहीं उठा सकती। कोर्ट ने याची के नियमितीकरण आदेश को संशोधित कर जूनियर कर्मचारियों को नियमित करने की तिथि से नियमित मानकर सेवा जनित सभी परिलाभों का याची को हकदार माना है।

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