सुशासन और विकास ही भाजपा का चेहरा
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फूलपुर के सांसद केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने अप्रैल में मास्टर स्ट्रोक खेला। पिछड़े वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के बाद यह माना जाने लगा था कि भाजपा मुख्यमंत्री पद के लिए अगड़ी जाति के नेता को ही सामने लाएगी। इलाहाबाद में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पूर्व सीएम पद के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह, गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ, सुल्तानपुर के सांसद वरुण गांधी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, लखनऊ के मेयर और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा आदि का नाम सामने आया लेकिन कार्यकारिणी की बैठक में इनमें से किसी के भी नाम पर मुहर नहीं लगी।
जातीय समीकरणों पर टिकी यूपी की राजनीति की बात करें तो सपा से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पिछड़े वर्ग से है तोे बसपा की मायावती अनुसूचित जाति एवं कांग्रेस की शीला दीक्षित ब्राह्मण बिरादरी की है। भाजपा के लिए भी लंबे समय से चर्चा है कि वह किसी अगड़ी जाति के नेता को ही यूपी में सीएम प्रत्याशी बनाएगी लेकिन चेहरों की चकाचौंध से दूर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा दो टूक कहते हैं, यूपी चुनाव में सुशासन और विकास ही भाजपा का चेहरा रहेगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में श्रीकांत शर्मा ने यूपी से अगड़ी जाति के नेता को प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा पर विराम लगा दिया। बोले, कांग्रेस, सपा, बसपा का भीतर ही भीतर गठबंधन है जो बीते डेढ़ दशक से बदस्तूर जारी है। भाजपा जातिवाद की राजनीति नहीं करती है। यूपी में सिर्फ सुशासन और विकास ही हमारा चेहरा रहेगा। कोई भी दल कितनी भी जोर आजमाइश करें, यूपी का किला भाजपा ही फतह करेगी।