मठ-मंदिर की बेची गई जमीनों का आनंद गिरि ने मांगा हिसाब
- राष्ट्रपति, पीएम व गृहमंत्री को भेजा पत्र, बोले- कीडगंज में गोपाल मंदिर का भी आधा हिस्सा बेचा गया
- संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के लाखों रुपये के चढ़ावे की भी जांच की मांग उठाई
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निरंजनी अखाड़े से निष्कासित योग गुरु आनंद गिरि और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के विवादों के बीच मठ-मंदिरों की जमीनों को लेकर भी घमासान शुरू हो गया है। स्वामी आनंद गिरि ने मंगलवार को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को पत्र भेजकर अखाड़े के विवाद से अवगत कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के कीडगंज में स्थित गोपाल मंदिर भी आधा बेच दिया गया है। मठ और मंदिर की बेची गई जमीनों के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के लाखों रुपये के चढ़ावे और प्रसाद से होने वाली बेहिसाब आमदनी की भी जांच कराने की मांग है।
स्वामी आनंद गिरि ने मंगलवार को बताया कि उनके गुरु महंत नरेंद्र गिरि ने अपने गुरु महंत रामगोविंद पुरी को निष्कासित कर दिया है। वह राजस्थान के एक मंदिर में शरण लिए हुए हैं। उनका सामान तक उठा कर फेंक दिया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ निरंजनी अखाड़े को मठ बाघंबरी गद्दी के अलावा अखाड़े की बेची गई जमीनों के करोड़ों रुपये किस मद में खर्च किए गए, इसकी जांच करानी चाहिए।
स्वामी आनंद गिरि ने सवाल खड़ा किया कि लेटे हनुमान जी मंदिर का जो चढ़ावा आता है, वह कहां, कैसे और किस मद में खर्च हो रहा है। सेना की जमीन पर बने हनुमान मंदिर के लड्डुओं की टेस्टिंग तक नहीं कराई जाती। स्वामी आनंद गिरि ने पीएम, सीएम से गुहार लगाई है कि महंत नरेंद्र गिरि ने गांव छतौना प्रतापपुर में अपने भाइयों के जो मकान बनवाए हैं, उसकी भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।