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हाईकोर्ट : पूर्णता प्रमाणपत्र के बिना फ्लैटों का कब्जा देने के मामले में जीडीए उपाध्यक्ष तलब

Wed, 09 Sep 2026 03:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 09 Sep 2026 03:03 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में पूर्णता प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) जारी होने से पहले फ्लैटों की बिक्री और खरीदारों को कब्जा दिए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष को तलब किया है।

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GDA Vice-Chairman summoned over handing over possession of flats without completion certificate.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में पूर्णता प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) जारी होने से पहले फ्लैटों की बिक्री और खरीदारों को कब्जा दिए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष को तलब किया है।

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सुरेश चंदर व 10 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने पूछा है कि प्राधिकरण की ओर से आपत्तियां उठाने और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर होने के बावजूद फ्लैटों का कब्जा कैसे दिया गया। कहा कि पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि भवन स्वीकृत नक्शे और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पूरा हुआ है।
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बिल्डर की ओर से कहा गया कि प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। प्राधिकरण की ओर से कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। इस पर प्रमाणपत्र को जारी हुआ माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि जीडीए ने आवेदन पर आपत्तियां दर्ज की थीं। बिल्डर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी। कोर्ट ने विरोधाभासी दावों पर कहा कि यदि प्राधिकरण ने पूर्णता प्रमाणपत्र को लेकर आपत्ति की थी और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी तो फ्लैट बेचने व खरीदारों को कब्जा देने की अनुमति कैसे दी गई।

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पूर्णता प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करता है कि फ्लैट रहने लायक है या नहीं

कोर्ट ने कहा कि पूर्णता प्रमाणपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन पूरी तरह तैयार और खरीदारों के रहने के लिए उपयुक्त है। सुनवाई में यह भी सामने आया कि प्राधिकरण की कार्यालयी नोटिंग में 29 मई 2006 के स्वीकृत भवन नक्शे को तीन जुलाई 2010 के आदेश से निरस्त किए जाने का उल्लेख है, लेकिन मूल रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश नहीं मिला। इससे भवन नक्शों को निरस्त और स्वीकृत करने की प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने जीडीए उपाध्यक्ष को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर कब्जा दिए जाने और नक्शे के निरस्तीकरण की परिस्थितियों पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। बिल्डर के अधिवक्ता को एफआईआर और कब्जा दिए जाने के संबंध में भी आदेश प्राप्त कर जानकारी देने के लिए कहा गया है। 10 सितंबर को सुनवाई होगी।

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