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अर्द्धकुंभ तक आचमन लायक होगा गंगा जल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 13 Aug 2017 02:29 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में जुटे केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों तथा अफसरों ने दावा करने के साथ अर्द्धकुंभ-2019 से पहले आचमन लायक गंगाजल के अविरल प्रवाह संकल्प भी लिया। संगम से कुछ दूर स्थित नैनी के युनाइटेड इंजीनियरिंग कालेज में शनिवार को आयोजित गंगा ग्राम सम्मेलन समारोह में शामिल ग्राम प्रधानों तथा स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों और गंगा सेवकों ने इस संकल्प को मजबूत आधार प्रदान किया। समारोह में शामिल मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री उमा भारती, नरेंद्र सिंह तोमर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, राज्यमंत्री भूपेंद्र सिंह ने जब भी गंगा और अर्द्धकुंभ को लेकर बात उठी भक्तों ने नारों और तालियों से उसका स्वागत करने के साथ खुद को महायज्ञ में आहुति देने के लिए तत्पर बताया।
उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक गंगा के किनारे बसे चार हजार से अधिक गांवों को मुख्यमंत्री ने खुले में शौच मुक्त घोषित किया। इस मौके पर कई योजनाओं की भी घोषणा की गई। अविरल और स्वच्छ गंगा तथा सफाई अभियान को सफल बनाने के मकसद से खुले में शौचमुक्त योजना का विस्तार, स्वच्छता रथ, समग्र गंगा ग्राम आदि योजनाओं की शुरुआत भी हुई। समारोह में उमा भारती ने स्वच्छता की शपथ दिलाई तो सीएम ने 2022 तक नए भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्द्धकुंभ-2019 महाआयोजन होगा। इसके लिए 2300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव बनाए गए हैं। 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा चुका है। काम में भी तेजी लाई जाएगी। अन्य सभी प्रस्ताव भी समय से पूरे होंगे। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से यह भी स्पष्ट हो गया कि 2300 करोड़ रुपये के सभी प्रस्तावों को सरकार ने मंजूर कर लिया है और जल्द ही काम शुरू होंगे। उन्होंने कहा कि इस साल का माघ मेला अर्द्धकुंभ की तैयारियों का रिहर्सल होगा।
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केंद्र सरकार की योजना सफल हुई तो सीवेज का ट्रीटेड पानी भी अब गंगा नदी में नहीं जाएगा। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि शोधित पानी को सिंचाई आदि दूसरे उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए पॉवर कारपोरेशन समेत कई अन्य संस्थाओं से समझौते भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरल धारा को बनाए रखा जाएगा। इसके अलावा गंगा के किनारे के जिलों और गांवों के विकास के साथ कुंड बनाए जाने समेत कई अन्य कार्य भी होंगे, जिससे गंगा में गंदगी न जाने पाए। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बिजनौर से बलिया तक 1025 किलोमीटर की दूरी गंगा नदी तय करती हैं। किनारे के सभी जिलों और गांवों को 31 दिसंबर तक खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा किनारे कुंड बनाए जाएंगे। ताकि, पुष्प आदि गंदगी को गंगा में सीधे जाने से बचाया जा सके। गंगा में जल की अविरलता को बनाए रखने के लिए एक हजार करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। कानपुर में भी टेनरियों को लेकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि अर्द्धकुंभ में गंगाजल आचमन के योग्य होगा।
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उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक गंगा के किनारे बसे चार हजार से अधिक गांवों को मुख्यमंत्री ने खुले में शौच मुक्त घोषित किया। इस मौके पर कई योजनाओं की भी घोषणा की गई। अविरल और स्वच्छ गंगा तथा सफाई अभियान को सफल बनाने के मकसद से खुले में शौचमुक्त योजना का विस्तार, स्वच्छता रथ, समग्र गंगा ग्राम आदि योजनाओं की शुरुआत भी हुई। समारोह में उमा भारती ने स्वच्छता की शपथ दिलाई तो सीएम ने 2022 तक नए भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्द्धकुंभ-2019 महाआयोजन होगा। इसके लिए 2300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव बनाए गए हैं। 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा चुका है। काम में भी तेजी लाई जाएगी। अन्य सभी प्रस्ताव भी समय से पूरे होंगे। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से यह भी स्पष्ट हो गया कि 2300 करोड़ रुपये के सभी प्रस्तावों को सरकार ने मंजूर कर लिया है और जल्द ही काम शुरू होंगे। उन्होंने कहा कि इस साल का माघ मेला अर्द्धकुंभ की तैयारियों का रिहर्सल होगा।
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केंद्र सरकार की योजना सफल हुई तो सीवेज का ट्रीटेड पानी भी अब गंगा नदी में नहीं जाएगा। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा कि शोधित पानी को सिंचाई आदि दूसरे उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए पॉवर कारपोरेशन समेत कई अन्य संस्थाओं से समझौते भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरल धारा को बनाए रखा जाएगा। इसके अलावा गंगा के किनारे के जिलों और गांवों के विकास के साथ कुंड बनाए जाने समेत कई अन्य कार्य भी होंगे, जिससे गंगा में गंदगी न जाने पाए। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बिजनौर से बलिया तक 1025 किलोमीटर की दूरी गंगा नदी तय करती हैं। किनारे के सभी जिलों और गांवों को 31 दिसंबर तक खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा किनारे कुंड बनाए जाएंगे। ताकि, पुष्प आदि गंदगी को गंगा में सीधे जाने से बचाया जा सके। गंगा में जल की अविरलता को बनाए रखने के लिए एक हजार करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। कानपुर में भी टेनरियों को लेकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि अर्द्धकुंभ में गंगाजल आचमन के योग्य होगा।