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शुरू हुई गंगाजल की जांच, इंडस्ट्री की निगरानी भी

Mon, 26 Dec 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 26 Dec 2016 01:05 AM IST
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Ganga began investigating, monitoring industry
गंगा 83 सेमी नीचे बही - फोटो : amar ujala
माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने के लिए साफ गंगाजल उपलब्ध हो सके, इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कमर कस ली है। बोर्ड ने गंगाजल के साथ यमुना के पानी का नमूना लेकर जांच शुरू करा दी है। मेला अवधि तक इलाहाबाद में पांच और कानपुर में दो स्थानों से नमूने लिए जाएंगे। मेले के दौरान नालों का पानी गंगा-यमुना न गिरे, इसके लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को सचेत भी कर दिया गया है। इसके अलावा इलाहाबाद से कानपुर तक इंडस्ट्री की निगरानी के लिए कमेटी भी बना दी गई है।
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माघ मेले का पहला प्रमुख स्नान पर्व 12 जनवरी को पौष पूर्णिमा से शुरू हो रहा है। इस दिन तक गंगा में साफ पानी उपलब्ध हो सके, इसके लिए बोर्ड इलाहाबाद में फाफामऊ, शास्त्री पुल के नीचे, संगम तथा डाउन स्ट्रीम में झूंसी से गंगाजल का नियमित रूप से नमूना ले रहा है। इसी तरह यमुना में करेलाबाग से पानी का नमूना लिया जा रहा है। इसके साथ कानपुर में बिठूर और डेवरी से गंगाजल का नमूना लिया जा रहा है। इसके जरिए जल में बीओडी समेत अन्य चीजों की जांच की जा रही है।

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बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ.मोहम्मद सिकंदर का कहना है कि  मेले के दौरान संगम आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए कई योजना बनाई गई है। बताया कि इकाई को नाले टैप करने को कह दिया गया है। इलाहाबाद एवं कानपुर की इंडस्ट्रियों पर मेला अवधि तक बारीकी से नजर रखी जाएगी। ताकि वहां से प्रदूषित पानी गंगा में न छोड़ा जाए। बताया कि नरौरा डैम से पानी छोड़े जाने के बाद यहां पहुंचने में करीब 15 दिन लगते हैं। अगले दो-तीन दिन में वहां से पानी छोड़े जाने की उम्मीद है।

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स्नान योग्य गंगा जल में बीओडी (बायो ऑक्सीजन डिमांड) का मानक तीन मिलीग्राम प्रति लीटर है। वर्तमान में गंगा में बीओडी की मात्रा चार के आसपास है, जबकि यमुना में यह मात्रा पांच से ऊपर है। डॉ.सिकंदर का कहना है कि नरौरा से यहां गंगाजल पहुंचने के बाद प्रदूषण की मात्रा तेजी से कम होगी। बताया कि  मुख्य स्नान पर्व से पहले प्रतिदिन दो बार जल का नमूना लेकर जांच की जाएगी।

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