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कसारी-मसारी में भी करोड़ों की जमीन में खेल

Sun, 16 Apr 2017 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 16 Apr 2017 02:07 AM IST
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Games in the land of crores in Kasari-Masari
FRAUD SHIMLA
एक के बाद एक विवादों के बीच कसारी-मसारी में भी जमीन का बड़ा खेल सामने आया है। वहां 14 साल बाद एक व्यक्ति के नाम जमीन किए जाने का परवाना जारी किया गया है। इतना ही नहीं उसमें विवादित भूखंड के अलावा दूसरे व्यक्ति की जमीन भी उनके नाम कर दी गई है। जबकि, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण ने उस जमीन को दूसरों को एलाट कर दिया है। इसकी शिकायत के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व डीएस पांडेय को जांच सौंपी गई है।
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कसारी-मसारी में चार अलग-अलग नंबर के अंतर्गत 7544 वर्गमीटर दो काश्ताकारों के नाम पर बराबर भागों में बांटी गई थी लेकिन इनमें से एक काश्तार की जमीन अर्बन सीलिंग के अंतर्गत आ गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने उस कब्जा ले लिया। इसके बाद विकास प्राधिकारण ने उस पर आवासीय निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। इसी बीच 2002 में वह जमीन फिर से काश्तकार के नाम करने का आदेश हुआ लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उसका अधिकार पत्र पिछले साल मई में जारी हुआ। खास यह कि परवाना में दूसरे काश्तार की जमीन भी उन्हीं के नाम कर दी गई है। इस तरह से 14 साल बाद वह भी गलत परवाना जारी होने को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा हो गया है। साथ में इसमें बड़े साजिश की आशंका जताई जा रही है। एडीएम डीएस पांडेय का कहना है कि उन्हें सिर्फ परवाना में गड़बड़ी को लेकर जांच करनी है। इसमें पुराना परवाना निरस्त कर नया आदेश जारी किया जाएगा। अन्य विवाद की जांच उन्हें नहीं करनी है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि 14 साल बाद परवाना जारी करने पर सवाल तो उठेगा।
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अफसराें तथा व्यवसायी की मिलीभगत से हुई जमीन घोटाले में 30 लोगों के खुद के मकान का सपना भी धाराशायी हो गया है। कमिश्नरी के पास दोहरी इंट्री वाले करोड़ों की जमीन पर से व्यवसायी का मालिकाना हक समाप्त करने के बाद अब वहां काबिज लोगों को बेदखल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकार की सख्ती को देखते हुए जल्द कार्रवाई की उम्मीद है। हालांकि इस कार्रवाई से निराश लोग कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं।
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कमिश्नरी के पास 17 हजार वर्गमीटर जमीन की राजकीय अस्थाना तथा नजूल में इंट्री होने का लेकर विवाद था लेकिन पिछली सरकार में उस जमीन को नजूल की भूमि बताते हुए व्यवसायी को मालिकाना हक दे दिया गया। पिछले तीन साल में उन्होंने उस जमीन को 25 से अधिक लोगों को बेच दिया। इलाहाबाद विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराकर ज्यादातर लोगों ने उस पर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया लेकिन मालिकाना हक समाप्त होने के बाद इनके सपनों को झटका लगा है। शासन के आदेश के बाद प्राधिकरण ने भी सभी का नक्शा निरस्त कर दिया है। जिला प्रशासन भी उस जमीन को खाली कराने की तैयारी में है। इस कार्रवाई से निराश लोग कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। अपर जिलाधिकारी लक्ष्मी शंकर सिंह का कहना है कि जमीन को खाली कराने की कार्रवाई जल्द की जाएगी। दूसरे लोगों को जमीन एलाट किए जाने की बाबत उनका कहना है कि इसमें प्रशासन कुछ नहीं कर सकता।


शहर में राजकीय अस्थान और नजूल के विवाद में फंसी सैकड़ों एकड़ और भी जमीन है। इन भूखंडों पर लोग वर्षों से काबिज हैं। इसी तरह के एक बड़े भूखंड पर शहर का प्रतिष्ठित स्कूल संचालित हो रहा है। इसके अलावा जार्जटाउन में भी कई बंगले हैं। सरकार के इस फैसले के बाद इन भूखंडों पर काबिज लोगों में भी डर सताने लगा है।
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