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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   From start-up to become young entrepreneurs

स्टार्ट-अप से युवा बन सकते हैं उद्यमी

Mon, 25 Jan 2016 01:37 AM IST
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Mon, 25 Jan 2016 01:37 AM IST
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फ्लिपकार्ट, आमेजन, गोडैडी, ओवाईओ रूम, ओला कैब, मेक माई ट्रिप, पेटीएम, स्नैपडील, उबर, निप्रा  जैसे कंपनियों ने ऑनलाइन मार्केटिंग से जिस तरह बेहद कम पूंजी लगाकर कम समय में करोड़ों-अरबों का कारोबार फैला लिया, देश के युवा भी अब उसी के नक्शे कदम पर आगे बढ़ सकते हैं। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की स्टार्ट-अप स्कीम का हिस्सा बनना होगा। इससे जुड़ने वाले युवाओं में व्यावहारिक ज्ञान, प्रबंधन के भी सारे गुण होने चाहिए। पहली बार उद्यमी बनने के लिए युवा 50 हजार से 10 करोड़ रुपये तक पूंजी निवेश कर स्टार्ट-अप का हिस्सा बन सकते हैं और स्टार्ट-अप के जरिए केंद्र सरकार की आर्थिक मदद से 25 करोड़ रुपये तक का कारोबार कर सकते हैं।

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कुछ वर्ष पहले तक देश में बड़े कारोबारियों पर चर्चा होती थी तो उसमें रिलायंस, टाटा, बिडला जैसी कुछ गिनी-चुनी कंपनियों का ही नाम आता था लेकिन अब समय बदला है लेकिन अब कुछ युवाओं ने देश में कारोबार की शैली को ही बदल डाला है। इसका उदाहरण हैं फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, आमेजन, ओवाईओ रूम, ओला कैब, मेक माई ट्रिप, पेटीएम जैसे कंपनियां। ऑनलाइन मार्केटिंग वाली इन कंपनियां में से ज्यादातर के निदेशकों ने कैरियर की शुरूआत 20-25 वर्ष की आयु में की और पिछले पांच-छह साल से पूरी दुनिया में छाए हुए हैं।

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कर एवं वित्त सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल का कहना है कि प्रतिस्पर्धा, पूंजी एवं समाजवाद में असंतुलन, सरकारी नौकरियों में धांधली एवं आरक्षण, प्राइवेट सेक्टर में उम्मीद से अत्यंत कम वेतन, युवा वर्ग को नौकरी खोजने में हतोत्साहित कर रहा है। इस समस्या से सिर्फ उद्यमी बनकर ही निबटा जा सकता है। इसी के लिए केंद्र सरकार ने स्टार्ट-अप स्कीम शुरू की है। स्टार्ट-अप के जरिए कारोबार करने वाले देश में ऐसे उद्यमियों की संख्या पांच हजार का आंकड़ा पार चुकी है, जो कारोबार की ऊंचाइयां छू रहे हैं। स्टार्ट-अपमें नए-नवेले प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कॉस्ट एकाउंटेंट्स, मूल्यांकक, शिक्षक हिस्सा बन सकते हैं।

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स्टार्ट-अप का हिस्सा बनने वाले युवा 50 हजार रुपये से कोराबार की शुरूआत कर सकते हैं। इसके लिए बेवसाइड पर एप बनाना होगा। सफल रणनीति के तहत ग्रासरी, खाद्य सामग्री, किचन वेयर, फर्नीचर, उपहार, कपड़े, इलेक्ट्रानिक्स सामान जैसी वस्तुओं का ऑनलाइन कारोबार किया जा सकता है।


ऑललाइन मार्केटिंग का पूरा कारोबार ब्रांडिंग पर टिका है। स्टार्ट-अप में कारोबार शुरू करने वाले युवाओं को इस पर विशेष ध्यान देना होगा। कंपनी की ओर से जो उत्पाद उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, उसकी ब्रांडिंग किस तरह से की जा रही है। यह बेहद महत्वपूर्ण हैं। जिस कंपनी की ब्रांडिंग जितनी ज्यादा, उसके उत्पादों की बिक्री भी उसी तरह होती है। वर्तमान में सोशल मीडिया के जरिए ब्रांडिंग का खेल चल रहा है। फ्ल्पिकार्ट, आमेजन, गोडैडी, मेक माई ट्रिप, पेटीएम, स्नैपडील जैसे ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को ऊंचाई पर पहुंचने के पीछे भी काफी हद तक ब्रांडिंग का ही असर है।


‘स्टार्ट-अप में युवाओं को नौकरी देने वाले की भूमिका में आना होगा। उन्हें उद्यम के प्रति ज्ञान बढ़ाना होगा, खुद की कंपनी लगाने के साथ अन्य स्रोत से आय भी अर्जित करनी होगी। निवेशकों से मित्रता आवश्यक है। इसमें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के साथ एक्सपर्ट एवं अनुभवी लोगों से रायमशविरा भी आवश्यक है।’ केएनएन सिंह, पूर्व निदेशक एमएसएमई एवं अध्यक्ष आइमा

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