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भर्ती में फर्जीवाड़ा : निरस्त होनी थी नियुक्ति और पदोन्नत होकर निदेशालय पहुंचे 40 कर्मचारी, मिलीभगत का खेल

Sat, 26 Oct 2024 11:29 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Oct 2024 11:29 AM IST
सार

वर्ष 2003 से 2006 तक निदेशक डा. गुरुदीप सिंह, अपर निदेशक दिलीप कुमार और आईटीआई के 20 प्रधानाचार्यों व क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारियों ने समूह ग और घ के पदों पर 438 लोगों की अनियमित तरीके से नियुक्ति की थी। 2010 में निदेशक हरिशंकर पांडेय ने जांच करवाई और इन नियुक्तियों को निरस्त करने की संस्तुति की थी।

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Fraud in recruitment: Appointment was to be canceled and 40 employees reached the directorate after getting pr
fraud फ्रॉड - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

प्रदेशभर की आईटीआई और सेवायोजन कार्यालयों में हुई अनियमित नियुक्ति में से पदोन्नत होकर 40 कर्मचारी प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय में तैनात हो गए हैं। 14 वर्ष पहले इन सभी की नियुक्ति निरस्त करने के लिए निदेशक ने संस्तुति कर दी गई थी। निदेशालय पहुंचे कर्मचारियों ने कार्यवाही की फाइल दबा दी है। इसलिए अब तक किसी पर कार्यवाही नहीं हुई है।

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वर्ष 2003 से 2006 तक निदेशक डा. गुरुदीप सिंह, अपर निदेशक दिलीप कुमार और आईटीआई के 20 प्रधानाचार्यों व क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारियों ने समूह ग और घ के पदों पर 438 लोगों की अनियमित तरीके से नियुक्ति की थी। 2010 में निदेशक हरिशंकर पांडेय ने जांच करवाई और इन नियुक्तियों को निरस्त करने की संस्तुति की थी। साथ ही अफसरों पर कार्यवाही का निर्देश दिया था। उसके बावजूद विभागीय अफसरों की मिलीभगत से किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।
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उल्टा इन सभी को पदोन्नति दे दी गई। पदोन्नति के बाद कइयों का स्थानांतरण कर दिया गया। 40 लोगों को निदेशालय में स्थानांतरण कर दिया गया। कार्यवाही निदेशालय से होनी थी, लेकिन अनियमित नियुक्ति वाले कर्मचारियों की वहां पर तैनाती के बाद से प्रक्रिया रुक गई। इस भर्ती के जरिए प्रदेश के लगभग सभी जिलों में कर्मचारी तैनात हैं और उनके वेतन पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।

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चाैकीदार से भर्ती हुए अब प्रधान सहायक बन गए

2005 में आईटीआई मथुरा में चाैकीदार के पद पर वीरेंद्र सोनकर भर्ती हुए। अफसरों की इन पर ऐसी मेहरबानी की 2011 में उन्हें प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय लखनऊ में स्थानांतरित किया और प्रधान सहायक बना दिया। ऐसे ही 2005 में ही चाैकीदार पद पर कानपुर में सुरेश कुमार सिंह, बरेली में अमित यादव, लखीमपुर खीरी में ब्रजेश कुमार चाैधरी, मथुरा में इमरान अहमद, सत्येंद्र कुमार की नियुक्ति हुई।

कुछ वर्षों बाद उन्हें प्रधाक सहायक बनाकर निदेशालय में तैनात कर दिया गया। इसके अलावा उसी दाैरान कनिष्ठ सहायक पद पर फतेहगढ़ प्रदीप कुमार सिंह, कानपुर में मृत्युंजय कुमार त्रिपाठी, कुमुद लता सिंह, नीना सिंह, मथुरा में सलिल दीक्षित, मेरठ संदीप बाजपेई, मनीष चंद्र, आगरा में आदित्य शेखर अवस्थी आदि की नियुक्ति हुई और उनको प्रधान सहायक बनाकर निदेशालय में तैनात कर दिया गया है।

इनकी नियुक्ति और पदोन्नति के खिलाफ भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता सुनील गुप्ता ने बताया कि फर्जी भर्ती के आरोपित अधिकारी कर्मचारी निदेशालय में तैनात है, इसलिए किसी पर कार्यवाही नहीं हो रही है।

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