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चार लाख वोटरों के फर्जी होने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:39 AM IST
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मतदाता
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जिले में मतदाताओं की संख्या 43 लाख के आसपास है और इनमें से चार लाख वोटरों के फर्जी होने की आशंका है। फर्जी का आशय डुप्लीकेट वोटरों से है, जो एक साथ कई बूथों, विधानसभा क्षेत्रों या अन्य जिलों में भी मतदाता हैं। आयोग ने ऐसे वोटरों के नाम की छंटनी कर सूची जिला निर्वाचन कार्यालय को सौंपी है। मौके पर स्थिति क्या है, यह जानने के लिए इन वोटरों का सत्यापन कराने को कहा है ताकि वोटरों की सही संख्या का पता लगाया जा सके और चुनाव के दौरान फर्जी मतदान पर लगाम लगाई जा सके।
डुप्लीकेट वोटर चुनाव को कई तरह से प्रभावित करते हैं और किसी भी चुनाव के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती भी हैं। डुप्लीकेट वोटरों के कारण मतदान प्रतिशत कभी सही नहीं आता। अगर बड़ी संख्या में डुप्लीकेट वोटर हैं तो उनका वोट नहीं पड़ता। ऐसे में पर्याप्त मतदान के बावजूद मतदान प्रतिशत कम रहता है। इसके अलावा फर्जी मतदान की आशंका भी बनी रहती है। वोटर कहीं और रहता है जबकि उनके नाम से वोट पड़ जाता है। डुप्लीकेट वोटर बनने के पीछे कई कारण भी हैं। अक्सर प्रत्याशी ही बाहर रहने वाले वोटरों के नाम अपने चुनाव क्षेत्र में जुड़वा देते हैं जबकि संबंधित वोटर किसी दूसरी जगह का मतदाता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिनके पते बदल गए और उन्होंने नई जगह की वोटर लिस्ट में अपना नाम भी जुड़वा लिया लेकिन पुरानी वोटर लिस्ट से नाम नहीं कटवाया।
निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर ने ऐसे वोटरों को चिह्नित कर लिया है लेकिन अभी यह तय नहीं हैं कि ये वोटर वर्तमान में किस जगह रहते हैं और कहां के मतदाता हैं। इलाहाबाद में भी ऐसे डुप्लीकेट वोटरों की संख्या तकरीबन चार लाख के आसपास है। डुप्लीकेट वोटरों की सूची सभी जिलों को भेजी गई है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके बाजपेयी ने बताया कि डुप्लीकेट वोटरों का सत्यापन कराया जा रहा है। जो वोटर मौजूदा पते पर नहीं मिलेंगे, उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए जाएंगे और जो वोटर उपस्थित मिलेंगे, उनके बारे में दूसरे जिलों को जानकारी दे दी जाएगी। अगर वे एक से दूसरे विधानसभा क्षेत्र में शिफ्ट हो गए हैं तो एक जगह से नाम काट दिया जाएगा।
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डुप्लीकेट वोटर चुनाव को कई तरह से प्रभावित करते हैं और किसी भी चुनाव के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती भी हैं। डुप्लीकेट वोटरों के कारण मतदान प्रतिशत कभी सही नहीं आता। अगर बड़ी संख्या में डुप्लीकेट वोटर हैं तो उनका वोट नहीं पड़ता। ऐसे में पर्याप्त मतदान के बावजूद मतदान प्रतिशत कम रहता है। इसके अलावा फर्जी मतदान की आशंका भी बनी रहती है। वोटर कहीं और रहता है जबकि उनके नाम से वोट पड़ जाता है। डुप्लीकेट वोटर बनने के पीछे कई कारण भी हैं। अक्सर प्रत्याशी ही बाहर रहने वाले वोटरों के नाम अपने चुनाव क्षेत्र में जुड़वा देते हैं जबकि संबंधित वोटर किसी दूसरी जगह का मतदाता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिनके पते बदल गए और उन्होंने नई जगह की वोटर लिस्ट में अपना नाम भी जुड़वा लिया लेकिन पुरानी वोटर लिस्ट से नाम नहीं कटवाया।
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निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर ने ऐसे वोटरों को चिह्नित कर लिया है लेकिन अभी यह तय नहीं हैं कि ये वोटर वर्तमान में किस जगह रहते हैं और कहां के मतदाता हैं। इलाहाबाद में भी ऐसे डुप्लीकेट वोटरों की संख्या तकरीबन चार लाख के आसपास है। डुप्लीकेट वोटरों की सूची सभी जिलों को भेजी गई है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके बाजपेयी ने बताया कि डुप्लीकेट वोटरों का सत्यापन कराया जा रहा है। जो वोटर मौजूदा पते पर नहीं मिलेंगे, उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए जाएंगे और जो वोटर उपस्थित मिलेंगे, उनके बारे में दूसरे जिलों को जानकारी दे दी जाएगी। अगर वे एक से दूसरे विधानसभा क्षेत्र में शिफ्ट हो गए हैं तो एक जगह से नाम काट दिया जाएगा।
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