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Prayagraj News: पद्मश्री डॉ. अजय की वैज्ञानिक प्रतिभा के कायल हुए पूर्व राष्ट्रपति
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प्रयागराज। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शहर के वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर की वैज्ञानिक क्षमता के कायल हैं। डॉ. सोनकर ने दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति से मिलकर जब बताया कि घरों से निकलने वाला प्लास्टिक का कचरा किस तरह हमारी भोजन की थाली में वापस पहुंच रहा है तो उन्होंने डॉ. अजय से उनके पूरे शोध के बारे में जानकारी ली और पत्र जारी कर प्रयागराज के वैज्ञानिक को अपनी शुभकामनाएं दीं।
डॉ. अजय के शोध को अमर उजाला में इस वर्ष 29 नवंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। शोध मलयेशिया की पत्रिका ‘इन्फोफिश इंटरनेशनल’ में प्रकाशित भी किया जा चुका है। इस शोध में दावा किया गया है कि प्लास्टिक कचरा अब हमारी भोजन की थाली में पहुंच गया है। यही नहीं, इसके माइक्राॅन के आकार वाले सूक्ष्म कण हवा में उड़ रहे हैं, बादलों के साथ बरस भी रहे हैं। यही कण भोजन के साथ शरीर में पहुंचकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे रहे हैं।
संगमनगरी के वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर को काला मोती बनाने के लिए 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वह इन दिनों स्विटजरलैंड की ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के फोरेंसिक जेनेटिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के साथ चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। उन्होंने अंडमान द्वीप समूह के समुद्री सीप के मेंटल टिश्यू में सूक्ष्म प्लास्टिक कणों की मौजूदगी पाई है।
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डॉ. अजय ने पूर्व राष्ट्रपति को अपने शोध के बारे में पूरी जानकारी दी। इससे प्रभावित होकर पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें पत्र लिखा और कहा कि पूरे विश्व में मानवीय हितों के लिए उनका शोध बेहद महत्वपूर्ण है। वह कामना करते हैं कि उनके अध्ययन का लाभ मानवता को मिले। पत्र में पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी लिखा है कि वर्ष 2004 में जब वह अंडमान स्थित डॉ. अजय की प्रयोगशाला में गए थे तो उनके कार्यों को देखकर उनकी वैज्ञानिक क्षमता से काफी प्रभावित हुए थे।
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डॉ. अजय के शोध को अमर उजाला में इस वर्ष 29 नवंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। शोध मलयेशिया की पत्रिका ‘इन्फोफिश इंटरनेशनल’ में प्रकाशित भी किया जा चुका है। इस शोध में दावा किया गया है कि प्लास्टिक कचरा अब हमारी भोजन की थाली में पहुंच गया है। यही नहीं, इसके माइक्राॅन के आकार वाले सूक्ष्म कण हवा में उड़ रहे हैं, बादलों के साथ बरस भी रहे हैं। यही कण भोजन के साथ शरीर में पहुंचकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे रहे हैं।
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संगमनगरी के वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर को काला मोती बनाने के लिए 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वह इन दिनों स्विटजरलैंड की ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के फोरेंसिक जेनेटिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के साथ चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। उन्होंने अंडमान द्वीप समूह के समुद्री सीप के मेंटल टिश्यू में सूक्ष्म प्लास्टिक कणों की मौजूदगी पाई है।
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डॉ. अजय ने पूर्व राष्ट्रपति को अपने शोध के बारे में पूरी जानकारी दी। इससे प्रभावित होकर पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें पत्र लिखा और कहा कि पूरे विश्व में मानवीय हितों के लिए उनका शोध बेहद महत्वपूर्ण है। वह कामना करते हैं कि उनके अध्ययन का लाभ मानवता को मिले। पत्र में पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी लिखा है कि वर्ष 2004 में जब वह अंडमान स्थित डॉ. अजय की प्रयोगशाला में गए थे तो उनके कार्यों को देखकर उनकी वैज्ञानिक क्षमता से काफी प्रभावित हुए थे।