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ईसीसी के पूर्व प्राचार्य पर वित्तीय अनियमितता का आरोप
Thu, 14 Mar 2019 01:14 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 Mar 2019 01:14 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेज यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. मारविन मैसी एवं कॉलेज की शिक्षिका उनकी पत्नी डॉ. पीएस मैसी पर वित्तीय अनियमितता का गंभीर आरोप लगा है। पूर्व प्राचार्य पर आरोप है कि वह परिसर स्थित कॉलेज हाउस में रहने के दौरान भी उनकी पत्नी ने मकान भत्ता लिया। विवि की ओर से पीआरओ ने आरोप लगाया है कि कॉलेज हाउस में रहने के दौरान डॉ. मैसी की पत्नी ने 2009 से लगातार मकान भत्ता के नाम पर 14 लाख 71 हजार से अधिक की राशि गलत तरीके से हासिल की।
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इविवि के कुलपति ने पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल में हुई वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए एक नवंबर 2018 को एक जांच कमेटी गठित की थी। पीआरओ डॉ. चितरंजन सिंह के अनुसार इस जांच कमेटी में विवि के वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र भी शामिल हैं, 25 फरवरी को वित्त अधिकारी ने कुलपति को 15 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी, इस रिपोर्ट में आरंभिक कई वित्तीय अनियमतता सामने आई हैं।
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पीआरओ के अनुसार जुलाई 2001 में जब डॉ. मारविन मैसी प्राचार्य बने तो वह परिवार सहित कॉलेज हाउस में आ गए। डॉ. मैसी ने प्राचार्य के अपने कार्यकाल के दौरान मकान भत्ता नहीं लिया। 2009 में डॉ. मारविन मैसी की पत्नी जो ईसीसी में ही एसोसिएट प्रोफेसर हैं ने मकान भत्ता लेना शुरू कर दिया। वह 2009 में जमुना कैंपस स्थित अपने नए बने मकान में रहने चली गईं और मार्च 2009 से उन्होंने मकान भत्ते का दावा किया, जबकि उनकेपति डॉ. मारविन मैसी ईसीसी कैंपस बने कॉलेज हाउस में रहते रहे। पीआरओ ने आरोप लगाया कि डॉ. मैसी एवं उनकी पत्नी ने भारत सरकार के नियमों की अनदेखी की है। अब इविवि उनसे 1472296 रुपए वसूलने की तैयारी में है। जांच कमेटी ने कॉलेज में नियुक्त दो शिक्षकों के मामले में गलत तरीके से वेतन देने में भी डॉ. मारविन मैसी को दोषी माना है।
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‘‘इविवि प्रशासन जान बूझकर उनके खिलाफ जांच करवाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश में लगा है। उनका कहना है कि 2009 में वह परिवार सहित जमुना कैंपस स्थित अपने निजी आवास में चले गए। वह कॉलेज हाउस का उपयोग नहीं कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अपने निजी आवास में रहते हुए उनकी पत्नी ने मकान भत्ते के लिए आवेदन किया, यह कहीं से भी नियमों का उलंघन नहीं है।’’
डॉ. मारविन मैसी,
पूर्व प्राचार्य, यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज
ईसीसी के मामले में विश्वविद्यालय के दखल पर रोक
हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को यूइंग क्रिश्चियन कालेज के प्रबंधकीय मामलों में हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कॉलेज की प्रबंध समिति को निलंबित कर नियंत्रक नियुक्त करने एवं कार्यकारी प्राचार्य नियुक्त करने के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कॉलेज के अल्पसंख्यक चरित्र को देखते हुए विश्वविद्यालय को कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करने का अधिकार है।यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने यूइंग क्रिश्चियन कालेज सोसायटी इलाहाबाद की प्रबंध समिति की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कालेज प्रबंध समिति ने 65 साल की आयु में सेवानिवृत्त हुए प्राचार्य का कार्यकाल 70 साल तक के लिए बढ़ा दिया था। जिस पर विश्वविद्यालय ने कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई की थी। जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।