{"_id":"6623a81d52b84d8210066c49","slug":"former-chief-engineer-of-noida-yadav-singh-did-not-get-relief-the-court-refused-to-intervene-2024-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : नोएडा के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इन्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : नोएडा के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इन्कार
Sat, 20 Apr 2024 05:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 20 Apr 2024 05:04 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने यादव सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। मामले में 13 जनवरी 2012 को गौतमबुद्धनगर में धोखाधड़ी, गबन, भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
विज्ञापन
यादव सिंह, चीफ इंजीनियर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नोएडा के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। सीबीआई की गाजियाबाद की विशेष अदालत ने धारा 88 के तहत पूरक चार्जशीट में जमानत बांड स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यादव सिंह सीआरपीसी की धारा 88 का लाभ पाने के हकदार नहीं हैं। वे नियमित जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने यादव सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। मामले में 13 जनवरी 2012 को गौतमबुद्धनगर में धोखाधड़ी, गबन, भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने याची के खिलाफ विभिन्न मामलों में तीन चार्जशीट दाखिल की। जिसमें आय से अधिक संपत्ति का भी केस बना। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
विज्ञापन
इसके बाद सीबीआई ने अलग बांड पर पूरक चार्जशीट दाखिल की। इसपर याची ने धारा 88 के तहत जमानत बांड स्वीकार करने की अर्जी दी। विशेष अदालत ने खारिज कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा गैर जमानती अपराध में समन जारी किया गया और आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई हो तो वह धारा 88 का लाभ नहीं ले सकेगा। विशेष अदालत का आदेश सही है। वह नियमित जमानत अर्जी दाखिल कर सकता है।
विज्ञापन