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इविवि में होगी लोक कला, वैदिक गणित की पढ़ाई
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय दर्शन, लोक कलाएं, योग एवं स्वास्थ्य, भारतीय संस्कृति, वैदिक गणित जैसे विषयों की भी पढ़ाई होगी। स्नातक के छात्र पहले वर्ष में इन विषयों की पढ़ाई कर सकेंगे। नई शिक्षा नीति के तहत इसे लागू लिए जाने की कवायद शुरू हो गई है। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए एक कमेटी का गठन भी किया है।
नए पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए एक नए स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्र्स की भी स्थापना किए जाने के प्रस्ताव पर विचार हो रहा है। नई शिक्षा नीति को क्रियान्वित करने के लिए कुलपति सभी डीन एवं अन्य विशेषज्ञों के साथ लगातार बैठकें भी कर रहीं हैं। कुलपति ने जो कमेटी बनाई है, उसका पहला प्रमुख कार्य होगा कि स्नातक का कोर्स तीन की जगह चार साल का हो। नई शिक्षा नीति में इसका प्रावधान किया गया है। इसके तहत छात्रों को स्वतंत्रता होगी कि वे न सिर्फ अपने कौशल का विकास करें, बल्कि अपनी रुचि के विषय भी पढ़ सकें। इसके लिए स्नातक के कार्यक्रम में लचीलापन भी होगा, जिससे छात्र बीच-बीच में पढ़ाई छोडक़र बाद में उसे दोबारा शुरू कर सकते हैं।
इसके लिए अलग-अलग समय अवधि के सर्टिफिकेट, डिग्री एवं ऑनर्स कोर्स होंगे, जो छात्रों को डिग्री पाने के लिए पूरे करने होंगे। हर कोर्स में मिलने वाला क्रेडिट उनके क्रेडिट बैंक में जमा होगा और जब पर्याप्त क्रेडिट इकट्ठे हो जाएंगे, तब छात्र अपनी डिग्री ले सकेंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किए जाएंगे, जो स्कूलों के पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर ने बताया कि जो मॉड्यूल तैयार होगा, उसमें कला और मानविकी के छात्रों के लिए भी प्रैक्टिकल, फील्ड वर्क, ट्रेनिंग और टूर को शामिल किया जाएगा। अभी कला और मानविकी के विषयों में इन अवयवों का अभाव है। इस कदम से कला और मानविकी के विषय पहले से ज्यादा रोचक एवं इंटरैक्टिव हो जाएंगे। इसके साथ ही सभी शिक्षकों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप कोर्स बना सकें और यह निर्णय भी ले सकें कि उस विषय को पढ़ाने के लिए किस रचना तंत्र का उपयोग करना है।
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नए पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए एक नए स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्र्स की भी स्थापना किए जाने के प्रस्ताव पर विचार हो रहा है। नई शिक्षा नीति को क्रियान्वित करने के लिए कुलपति सभी डीन एवं अन्य विशेषज्ञों के साथ लगातार बैठकें भी कर रहीं हैं। कुलपति ने जो कमेटी बनाई है, उसका पहला प्रमुख कार्य होगा कि स्नातक का कोर्स तीन की जगह चार साल का हो। नई शिक्षा नीति में इसका प्रावधान किया गया है। इसके तहत छात्रों को स्वतंत्रता होगी कि वे न सिर्फ अपने कौशल का विकास करें, बल्कि अपनी रुचि के विषय भी पढ़ सकें। इसके लिए स्नातक के कार्यक्रम में लचीलापन भी होगा, जिससे छात्र बीच-बीच में पढ़ाई छोडक़र बाद में उसे दोबारा शुरू कर सकते हैं।
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इसके लिए अलग-अलग समय अवधि के सर्टिफिकेट, डिग्री एवं ऑनर्स कोर्स होंगे, जो छात्रों को डिग्री पाने के लिए पूरे करने होंगे। हर कोर्स में मिलने वाला क्रेडिट उनके क्रेडिट बैंक में जमा होगा और जब पर्याप्त क्रेडिट इकट्ठे हो जाएंगे, तब छात्र अपनी डिग्री ले सकेंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किए जाएंगे, जो स्कूलों के पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर ने बताया कि जो मॉड्यूल तैयार होगा, उसमें कला और मानविकी के छात्रों के लिए भी प्रैक्टिकल, फील्ड वर्क, ट्रेनिंग और टूर को शामिल किया जाएगा। अभी कला और मानविकी के विषयों में इन अवयवों का अभाव है। इस कदम से कला और मानविकी के विषय पहले से ज्यादा रोचक एवं इंटरैक्टिव हो जाएंगे। इसके साथ ही सभी शिक्षकों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप कोर्स बना सकें और यह निर्णय भी ले सकें कि उस विषय को पढ़ाने के लिए किस रचना तंत्र का उपयोग करना है।
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