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पांच लोगों की मौत पर कई घंटे बवाल
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Thu, 14 May 2015 02:46 AM IST
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करछना/नैनी (इलाहाबाद)। यमुनापार के करछना इलाके में मिर्जापुर मार्ग पर बुधवार सुबह बाइक सवार पति-पत्नी और उनके दो बच्चों को टक्कर मारने के बाद मिनी बस पलट गई। बाइक सवार चार लोगों के अलावा बस के कंडक्टर की भी हादसे में मौत के बाद वहां जुटी भीड़ ने बवाल कर दिया। शव हटाने का विरोध करते हुए लोगों ने मिर्जापुर मार्ग और रेलवे ट्रैक पर जाम लगा दिया। पुलिस ने रोका तो भीड़ ने पथराव कर खदेड़ते हुए भीरपुर चौकी में तोड़फोड़ और आगजनी की। पथराव में एसपी, एसडीएम, सीओ समेत कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए तो पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें कई लोग जख्मी हुए। बड़ी मशक्कत के बाद शाम को लोग रेलवे ट्रैक से हटे। नेताओं के समझाने पर देर शाम सड़क पर चक्काजाम खत्म हुआ।
मेजा में उरूवा चपरताल गांव निवासी रामबहादुर पटेल अपनी पत्नी राजपति और दो बच्चों के साथ करछना के मझुआ गांव में रिश्तेदार संतलाल की बेटी के शादी समारोह में गया था। वहां से बुधवार सुबह वह पत्नी-बच्चों के साथ बाइक पर घर के लिए रवाना हुआ। करीब पौने दस बजे वह मिर्जापुर मार्ग पर भीरपुर के निकट बरम मोडी के पास पहुंचा तभी मेजा से शहर आ रही मिनी बस ने जोरदार टक्कर मार दी। फिर बस भी बेकाबू होकर आसपास की गुमटियों तथा डीजे को रौंदते हुए पलट गई।
राहगीर तथा आसपास के लोग जुटे तो खबर पाकर भीरपुर चौकी की पुलिस वहां पहुंची। बस की चपेट में आने से रामबहादुर (30), उसकी पत्नी राजपति (27), बेटे अश्विनी (4), बेटी साक्षी (3) की मौत हो गई थी। भीड़ में गुस्से को देखते हुए पुलिस ने एंबुलेंस मंगाकर सभी शव शहर में पोस्टमार्टम हाउस भेज दिए। बस पलटने से घायल कंडक्टर राजकुमार (35) निवासी देवरी गांव, हलिया, मिर्जापुर की भी अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई। पांच लोगों की मौत की खबर पाकर करछना, मेजा, नैनी, औद्योगिक क्षेत्र समेत कई थानोें की पुलिस पहुंची मगर तब तक वहां भीड़ ने चक्काजाम कर दिया। इसी बीच सीओ समरबहादुर और एसडीएम करछना राजकुमार द्विवेदी भी पहुंच गए। वहां जुटे लोगों ने मृतकों के परिजनों के आए बिना शव हटाने पर आक्रोश जाहिर किया तो सीओ और एसडीएम ने कहा कि उन्हें घायल समझकर फौरन इलाज की खातिर हटाया गया था। मगर देखते ही देखते भीड़ ने सीओ और एसडीएम से हुज्जत शुरू कर दी। फिर उन्हें दौड़ा लिया।
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भीड़ ने कुछ दूर पर भीरपुर चौकी में घुसकर तोड़फोड़ की और कागजात जला दिए। वहां से लौटकर 11.55 बजे भीड़ ने इलाहाबाद-मिर्जापुर रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रखकर जाम लगा दिया। इस वजह से बांबे मेल को वहां रोकना पड़ा। इस भीड़ में कचरी समेत कई गांव के वे लोग भी शमिल हो गए जो पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। एसपी यमुनापार नीरज पांडेय ने आकर चक्काजाम समाप्त कराने की कोशिश की तो भीड़ ने पथराव कर दिया। ऐसे में पुलिस ने फायरिंग कर दी।
पथराव में एसपी नीरज, सीओ समरबहादुर, एसडीएम राजकुमार, उनके अर्दली नचकऊ सिंह, दरोगा पखंडुराम, सिपाही विजयशंकर यादव समेत एक दर्जन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। पुलिस फायरिंग में भी पांच लोग घायल हुए। पुलिस फायरिंग के जवाब में भीड़ ने भी गोलियां चलाईं जिससे एक सिपाही घायल हुआ। बवाल बढ़ने पर सीडीओ अटल राय भी आ गए। आरपीएफ, पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स को बुला लिया गया। नेताओं की मध्यस्थ्ता और अफसरों की चेतावनी के बाद करीब पौने पांच बजे रेलवे ट्रैक से लोग हटे तो स्लीपर हटाकर ट्रेनों का आवागमन शुरू कराया गया। शाम करीब सात बजे मिर्जापुर मार्ग पर भी चक्काजाम खत्म हुआ।
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मेजा में उरूवा चपरताल गांव निवासी रामबहादुर पटेल अपनी पत्नी राजपति और दो बच्चों के साथ करछना के मझुआ गांव में रिश्तेदार संतलाल की बेटी के शादी समारोह में गया था। वहां से बुधवार सुबह वह पत्नी-बच्चों के साथ बाइक पर घर के लिए रवाना हुआ। करीब पौने दस बजे वह मिर्जापुर मार्ग पर भीरपुर के निकट बरम मोडी के पास पहुंचा तभी मेजा से शहर आ रही मिनी बस ने जोरदार टक्कर मार दी। फिर बस भी बेकाबू होकर आसपास की गुमटियों तथा डीजे को रौंदते हुए पलट गई।
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राहगीर तथा आसपास के लोग जुटे तो खबर पाकर भीरपुर चौकी की पुलिस वहां पहुंची। बस की चपेट में आने से रामबहादुर (30), उसकी पत्नी राजपति (27), बेटे अश्विनी (4), बेटी साक्षी (3) की मौत हो गई थी। भीड़ में गुस्से को देखते हुए पुलिस ने एंबुलेंस मंगाकर सभी शव शहर में पोस्टमार्टम हाउस भेज दिए। बस पलटने से घायल कंडक्टर राजकुमार (35) निवासी देवरी गांव, हलिया, मिर्जापुर की भी अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई। पांच लोगों की मौत की खबर पाकर करछना, मेजा, नैनी, औद्योगिक क्षेत्र समेत कई थानोें की पुलिस पहुंची मगर तब तक वहां भीड़ ने चक्काजाम कर दिया। इसी बीच सीओ समरबहादुर और एसडीएम करछना राजकुमार द्विवेदी भी पहुंच गए। वहां जुटे लोगों ने मृतकों के परिजनों के आए बिना शव हटाने पर आक्रोश जाहिर किया तो सीओ और एसडीएम ने कहा कि उन्हें घायल समझकर फौरन इलाज की खातिर हटाया गया था। मगर देखते ही देखते भीड़ ने सीओ और एसडीएम से हुज्जत शुरू कर दी। फिर उन्हें दौड़ा लिया।
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भीड़ ने कुछ दूर पर भीरपुर चौकी में घुसकर तोड़फोड़ की और कागजात जला दिए। वहां से लौटकर 11.55 बजे भीड़ ने इलाहाबाद-मिर्जापुर रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रखकर जाम लगा दिया। इस वजह से बांबे मेल को वहां रोकना पड़ा। इस भीड़ में कचरी समेत कई गांव के वे लोग भी शमिल हो गए जो पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। एसपी यमुनापार नीरज पांडेय ने आकर चक्काजाम समाप्त कराने की कोशिश की तो भीड़ ने पथराव कर दिया। ऐसे में पुलिस ने फायरिंग कर दी।
पथराव में एसपी नीरज, सीओ समरबहादुर, एसडीएम राजकुमार, उनके अर्दली नचकऊ सिंह, दरोगा पखंडुराम, सिपाही विजयशंकर यादव समेत एक दर्जन पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। पुलिस फायरिंग में भी पांच लोग घायल हुए। पुलिस फायरिंग के जवाब में भीड़ ने भी गोलियां चलाईं जिससे एक सिपाही घायल हुआ। बवाल बढ़ने पर सीडीओ अटल राय भी आ गए। आरपीएफ, पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स को बुला लिया गया। नेताओं की मध्यस्थ्ता और अफसरों की चेतावनी के बाद करीब पौने पांच बजे रेलवे ट्रैक से लोग हटे तो स्लीपर हटाकर ट्रेनों का आवागमन शुरू कराया गया। शाम करीब सात बजे मिर्जापुर मार्ग पर भी चक्काजाम खत्म हुआ।