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आसमान से बरसी आग, दूसरे दिन भी पारा 47 पर ठहरा
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sun, 24 May 2015 01:44 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। बच्चों, बुजुर्गों के अलावा ऐसे लोग जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो, घर से न निकलें। कारण कि आसमान से सूरज आग फेंक रहा है। सड़क भट्ठी बन गई है। पारा इस कदर ऊपर चढ़ गया है कि शरीर के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। शनिवार को दूसरे दिन भी इस गर्मी का सबसे गरम दिन रहा। पारा लगातार दूसरे दिन भी 47 डिग्री पर ठहरा रहा।
सूरज ने ऐसा जलवा दिखाया कि पूरे दिन शहर की सड़कें भट्टी जैसी तपती रहीं। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को अधिकतम तापमान 47 डिग्री और न्यूनतम 27.8 डिग्री दर्ज किया गया। तमतमाए सूरज का ही असर रहा कि न्यूनतम आर्र्दता 14 फीसदी पर पहुंच गई जिसने आग में घी का काम किया। नमी बेहद कम होने से लोग गर्मी से बेहाल रहे। दोपहर में सड़कों पर ऐसा सन्नाटा रहा जैसे कि शहर में कफ्यू लगा है। इक्का दुक्का जो सड़कों पर दिखे वे भी जान बचाकर घरों की ओर निकल भागे।
नमी गुम, दो दर्जन से अधिक अचेत
चटक धूप के साथ वातावरण में नमी अचानक गुम हो गई है। शनिवार दिन में जब पारा 47 पर था तो नमी केवल 14 फीसदी थी। विशेषज्ञोें के मुताबिक इतनी तेज धूप में वातावरण से नमी गायब होना बड़ा खतरा है। नमी लगभग खत्म होने का नतीजा रहा कि शहर में अलग-अलग हिस्सों में दो दर्जन से अधिक लोग अचेत हो गए। घंटाघर, बहादुरगंज, मुट्ठीगंज, कटरा, तेलियरगंज, अल्लापुर बाजार में दोपहर को राहगीर और खरीदार अचेत हुए। व्यापारी पानी पिलाकर, हवा करके उन्हें होश में लाए। कई बेसुध लोगों को अस्पतालों मेें ले जाना पड़ा। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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सरकारी अस्पतालों में वार्डों से बाहर भागे मरीज-तीमारदार
गर्मी और भारी उमस का असर यह रहा कि एसआरएन, बेली, काल्विन और डफरिन जैसे सरकारी अस्पतालों में भर्ती कई मरीज और तीमारदार वार्डों से निकलकर बाहर आ गए। मरीजों-तीमारदारों ने अस्पतालों केपरिसर में पेड़ों के नीचे जाकर राहत पाने की कोशिश की, लेकिन सुकून नहीं मिला। रही सही कसर बिजली की आंख मिचौली ने पूरी कर दी है। अस्पतालों में कई घंटे की बिजली कटौती के बाद बिजली का बार-बार आना जाना मरीजों-तीमारदारों के लिए खासा मुसीबत भरा रहा।
खूब खाएं तरबूज, खरबूजा और सत्तू, जमकर लें पेय पदार्थ
आयुर्वेदाचार्य डॉ. एसके राय के मुताबिक गर्मी और उमस के इस मौसम में यदि शरीर को स्वस्थ बनाएं रखना है तो तरबूज, खरबूजा जैसे फलों के सेवन के साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्सयुक्त सत्तू का सेवन करें। इससे जहां लू, और हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है, वहीं ग्लूकोज या फिर ओआरएस पीकर शरीर की क्षमता को बरकरार बनाए रखा जा सकता है। बकौल डॉ. राय गर्मी और उमस से शरीर में सोडियम की मात्रा बेहद कम हो जाती है जिससे चक्कर और बेचैनी की संभावना बढ़ जाती है। बेली अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. ओपी त्रिपाठी के मुताबिक इस मौसम में खानपान में एहतियात बरतकर तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है।
हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा
तापमान 47 डिग्री होने पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल की प्रोफेसर डॉ. अनुभा का कहना है कि 47 डिग्री तापमान और 14 फीसदी आर्द्रता से हीट स्ट्रोक का पूरा खतरा है। ऐसे में एहतियात बरतने की जरूरत है। जहां तक लू या हीट स्ट्रोक के लक्षणों का सवाल है तो अत्यधिक प्यास के साथ ही गला सूख जाना, मरीज को कमजोरी के साथ शरीर शिथिल हो जाना, पेट में तेज दर्द, मूत्र का रंग पीला होना, अत्यधिक बेचैनी महसूस होना व अंत मे बेहोश हो जाना बीमारी के सामान्य लक्षण है।
गर्मी से कैसे करेें बचाव:
00 आवश्यक कार्यों को सुबह शाम निपटाएं, धूप से बचें।
00 चटक धूप में छाता लेकर निकलें, चेहरे को तौलिया या गमछे से ढक लें।
00 ताजे फल, सब्जियां काटकर नमक के साथ लें।
00 खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा के साथ ही तरल पेय पदार्थ लें।
00 मट्ठा, दही, लस्सी, नींबू-नमक-चीनी की शिकंजी बनाकर पीयें।
00 उल्टी, बेचैनी होने पर तत्काल प्यास का रस पीयें।
00 ढीले सूती कपड़े पहनें।
00 धूप में चश्मा जरूर पहनकर निकलें, गाड़ी चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं।
00 व्यायाम बंद कमरे में करने केबजाए खुले मैदान या घर के बाहर करें।
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सूरज ने ऐसा जलवा दिखाया कि पूरे दिन शहर की सड़कें भट्टी जैसी तपती रहीं। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को अधिकतम तापमान 47 डिग्री और न्यूनतम 27.8 डिग्री दर्ज किया गया। तमतमाए सूरज का ही असर रहा कि न्यूनतम आर्र्दता 14 फीसदी पर पहुंच गई जिसने आग में घी का काम किया। नमी बेहद कम होने से लोग गर्मी से बेहाल रहे। दोपहर में सड़कों पर ऐसा सन्नाटा रहा जैसे कि शहर में कफ्यू लगा है। इक्का दुक्का जो सड़कों पर दिखे वे भी जान बचाकर घरों की ओर निकल भागे।
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नमी गुम, दो दर्जन से अधिक अचेत
चटक धूप के साथ वातावरण में नमी अचानक गुम हो गई है। शनिवार दिन में जब पारा 47 पर था तो नमी केवल 14 फीसदी थी। विशेषज्ञोें के मुताबिक इतनी तेज धूप में वातावरण से नमी गायब होना बड़ा खतरा है। नमी लगभग खत्म होने का नतीजा रहा कि शहर में अलग-अलग हिस्सों में दो दर्जन से अधिक लोग अचेत हो गए। घंटाघर, बहादुरगंज, मुट्ठीगंज, कटरा, तेलियरगंज, अल्लापुर बाजार में दोपहर को राहगीर और खरीदार अचेत हुए। व्यापारी पानी पिलाकर, हवा करके उन्हें होश में लाए। कई बेसुध लोगों को अस्पतालों मेें ले जाना पड़ा। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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सरकारी अस्पतालों में वार्डों से बाहर भागे मरीज-तीमारदार
गर्मी और भारी उमस का असर यह रहा कि एसआरएन, बेली, काल्विन और डफरिन जैसे सरकारी अस्पतालों में भर्ती कई मरीज और तीमारदार वार्डों से निकलकर बाहर आ गए। मरीजों-तीमारदारों ने अस्पतालों केपरिसर में पेड़ों के नीचे जाकर राहत पाने की कोशिश की, लेकिन सुकून नहीं मिला। रही सही कसर बिजली की आंख मिचौली ने पूरी कर दी है। अस्पतालों में कई घंटे की बिजली कटौती के बाद बिजली का बार-बार आना जाना मरीजों-तीमारदारों के लिए खासा मुसीबत भरा रहा।
खूब खाएं तरबूज, खरबूजा और सत्तू, जमकर लें पेय पदार्थ
आयुर्वेदाचार्य डॉ. एसके राय के मुताबिक गर्मी और उमस के इस मौसम में यदि शरीर को स्वस्थ बनाएं रखना है तो तरबूज, खरबूजा जैसे फलों के सेवन के साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्सयुक्त सत्तू का सेवन करें। इससे जहां लू, और हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है, वहीं ग्लूकोज या फिर ओआरएस पीकर शरीर की क्षमता को बरकरार बनाए रखा जा सकता है। बकौल डॉ. राय गर्मी और उमस से शरीर में सोडियम की मात्रा बेहद कम हो जाती है जिससे चक्कर और बेचैनी की संभावना बढ़ जाती है। बेली अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. ओपी त्रिपाठी के मुताबिक इस मौसम में खानपान में एहतियात बरतकर तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है।
हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा
तापमान 47 डिग्री होने पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल की प्रोफेसर डॉ. अनुभा का कहना है कि 47 डिग्री तापमान और 14 फीसदी आर्द्रता से हीट स्ट्रोक का पूरा खतरा है। ऐसे में एहतियात बरतने की जरूरत है। जहां तक लू या हीट स्ट्रोक के लक्षणों का सवाल है तो अत्यधिक प्यास के साथ ही गला सूख जाना, मरीज को कमजोरी के साथ शरीर शिथिल हो जाना, पेट में तेज दर्द, मूत्र का रंग पीला होना, अत्यधिक बेचैनी महसूस होना व अंत मे बेहोश हो जाना बीमारी के सामान्य लक्षण है।
गर्मी से कैसे करेें बचाव:
00 आवश्यक कार्यों को सुबह शाम निपटाएं, धूप से बचें।
00 चटक धूप में छाता लेकर निकलें, चेहरे को तौलिया या गमछे से ढक लें।
00 ताजे फल, सब्जियां काटकर नमक के साथ लें।
00 खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा के साथ ही तरल पेय पदार्थ लें।
00 मट्ठा, दही, लस्सी, नींबू-नमक-चीनी की शिकंजी बनाकर पीयें।
00 उल्टी, बेचैनी होने पर तत्काल प्यास का रस पीयें।
00 ढीले सूती कपड़े पहनें।
00 धूप में चश्मा जरूर पहनकर निकलें, गाड़ी चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं।
00 व्यायाम बंद कमरे में करने केबजाए खुले मैदान या घर के बाहर करें।