प्रयागराज: एसआरएन अस्पताल में शार्ट सर्किट से लगी आग, मची रही अफरातफरी
घटना सुबह 11 बजे के करीब हुई। आर्थोपेडिक विभाग के ओटी-वन में मरीज का ऑपरेशन चल रहा था। जबकि, सात मरीज ओटी के बगल स्थित रेस्ट रूम में थे। अचानक ओटी के ठीक बाहर स्थित गैलरी की फाल्स सीलिंग में आग लग गई। इससे कुछ ही देर में चारों ओर धुआं भर गया।
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एसआरएन अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के आर्थोपेडिक विभाग में सुबह आग लग गई। आग ऑपरेशन थियेटर एक के सामने स्थित गैलरी में लगी। हालांकि, फायर ब्रिगेड ने समय रहते आग पर काबू पा लिया। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
घटना सुबह 11 बजे के करीब हुई। आर्थोपेडिक विभाग के ओटी-वन में मरीज का ऑपरेशन चल रहा था। जबकि, सात मरीज ओटी के बगल स्थित रेस्ट रूम में थे। अचानक ओटी के ठीक बाहर स्थित गैलरी की फाल्स सीलिंग में आग लग गई। इससे कुछ ही देर में चारों ओर धुआं भर गया।
आग लगने की जानकारी हुई तो अफरातफरी मची। सूचना दी गई तो फायरब्रिगेड पहुंची और सबसे पहले विद्युत आपूर्ति बाधित कराई गई। इसके बाद एक टीम आग बुझाने में जुट गई जबकि दूसरी टीम ने रेस्ट रूम में मौजूद सात मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया।
आग फैलती, इससे पहले ही फायर ब्रिगेड की टीम ने उस पर काबू पा लिया। हालांकि तब तक गैलरी में धुआं भर चुका था। इसके बाद फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने खिड़कियों को खोला तब जाकर धुआं छटा।
कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया गया। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। संभवत: आग वायरिंग में शॉर्ट सर्किट के चलते लगी। - डॉ. राजीव पांडेय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
फायर इंस्टिग्विशर छोड़ अग्निशमन के अन्य इंतजाम ध्वस्त
एसआरएन अस्पताल में बुधवार को आग लगने की घटना के बाद चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि यहां फायर इंस्टिग्विशर छोड़कर अग्निशमन के अन्य सारे इंतजाम ध्वस्त हैं। हौज रील, हौज पाइप समेत अन्य सभी उपकरण खराब पड़े मिले।
यह हाल तब है जब अग्निशमन विभाग की ओर से लगातार एसआरएन अस्पताल व मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र भेजकर इस संबंध में ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। मौजूदा साल में ही ऐसे तीन पत्र अग्निशमन विभाग की ओर से भेजे जा चुके हैं।
जानकारों का कहना है कि गनीमत रही कि बुधवार को लगी आग पर कुछ देर में ही काबू पा लिया गया। आग फैलती तो अस्पताल में उपलब्ध इंतजामों के बूते इस पर काबू पाना आसान नहीं होता। इस संबंध में मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. राजीव पांडेय का कहना है कि अस्पताल में अग्निशमन उपायों में सिर्फ फायर इंस्टिग्विशर ही ठीक मिले। अन्य व्यवस्थाएं ध्वस्त थीं। इस संबंध में पहले भी कई बार एसआरएन अस्पताल व मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र भेजकर निवेदन किया जा चुका है।
महाधिवक्ता भवन में हुई दुर्घटना से नहीं लिया सबक
अग्निशमन के इंतजाम दुरुस्त न होने पर एसआरएन अस्पताल व मेडिकल कॉलेज प्रबंधन सवालों के घेरे में है। यह भी कहा जा रहा है कि लगभग एक महीने पहले महाधिक्ता कार्यालय में हुई अग्निदुर्घटना से भी अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया। महाधिवक्ता कार्यायल में हुई दुर्घटना में अन्य कारणों के साथ ही अग्निशमन व्यवस्था ठीक न होना भी एक बड़ी वजह थी। जानकारों का कहना है कि एसआरएन अस्पताल में रोजाना हजारों मरीजों का आना-जाना होता है। इसके बावजूद इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान से बड़ा खिलवाड़ है।
दो माह पहले स्वास्थ्य मंत्री ने किया था उद्घाटन
एसआरएन की पुरानी बिल्डिंग में बने मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर का उद्घाटन 12 जून 2022 को हुआ था। इसका उद्घाटन डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने किया था। अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि इतनी जल्दी दिक्कत आना समझ से परे है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने कार्यदायी संस्था और थर्ड पार्टी ऑडिट करने वाली संस्था से जवाब मांगा है।
चिकित्सकों ने बताया कि बुधवार को नौ मरीजों का ऑपरेशन होना था। दो मरीजों का ऑपरेशन हो चुके थे। एक मरीज को एनीथीसिया भी दिया जा चुका था। तब तक धुंआ भरने से अफरातफरी मच गई। डॉक्टर आनन फानन मरीजों को बाहर निकालने में लग गए।