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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Degrees of 26 advocates submitted to the Bar Council found to be fake; fraud exposed during verification; FIR

UP : बार काउंसिल में जमा 26 अधिवक्ताओं की डिग्री निकली फर्जी, सत्यापन में खुली पोल, एफआईआर दर्ज

Sun, 09 Aug 2026 07:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 09 Aug 2026 07:07 PM IST
सार

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव ने 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह प्राथमिकी बार काउंसिल के सचिव आरके शुक्ला की शिकायत पर दर्ज की गई है।

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Degrees of 26 advocates submitted to the Bar Council found to be fake; fraud exposed during verification; FIR
26 अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रयागराज में एफआईआर दर्ज। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

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फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर बार काउंसिल में पंजीकरण कराकर वकालत करने के आरोप में 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला की ओर से यह कार्रवाई कराई गई है। बार काउंसिल के स्तर से कराए गए सत्यापन में इन अधिवक्ताओं की डिग्री और अंकपत्र फर्जी पाए जाने का दावा किया गया है।

एफआईआर के मुताबिक, मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश से जुड़ा है। कफील बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य मामले में हाईकोर्ट ने तीन जून 2026 को आदेश पारित किया था। इसमें बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकृत एक अधिवक्ता की डिग्री सत्यापन के दौरान फर्जी पाए जाने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद बार काउंसिल ने संबंधित अधिवक्ता के शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया। आरोप है कि लखनऊ निवासी एक अधिवक्ता ने वर्ष 2013 की स्नातक डिग्री और अंकपत्र अपने अधिवक्ता सीओपी आवेदन पत्र के साथ लगाया था।

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दस्तावेजों को सत्यापन के लिए राजस्थान के पिलानी स्थित श्रीधर विश्वविद्यालय भेजा गया। विश्वविद्यालय से प्राप्त रिपोर्ट में अंकपत्र की छायाप्रति को वहां के अभिलेखों के अनुसार गलत और असत्य बताया गया। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिवक्ता को छह मई 2024 को समिति की ओर से नोटिस भेजा गया था। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। इसी तरह अन्य अधिवक्ताओं के खिलाफ फर्जी डिग्री लगाकर वकालत करने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

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अलग-अलग विश्वविद्यालयों की डिग्री का इस्तेमाल

सत्यापन के दौरान अलग-अलग राज्यों और जिलों के विश्वविद्यालयों की डिग्रियां भी फर्जी पाई गईं। इनमें राजस्थान के पिलानी श्रीधर विश्वविद्यालय, बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय, मेरठ के स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, तमिलनाडु के तिरुवल्लुवर विश्वविद्यालय समेत अन्य शहरों के विश्वविद्यालय की की डिग्रियां शामिल हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराने पर उन्होंने बताया कि प्रस्तुत की गई डिग्रियां उनके यहां की नहीं हैं।

100 के खिलाफ दर्ज हो सकती है एफआईआर

बार काउंसिल की ओर से करीब 100 अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी गई है। सत्यापन में इन अधिवक्ताओं की डिग्री और अंकपत्र फर्जी पाए जाने का दावा किया गया है। पुलिस दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में सभी के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर सकती है।

पुलिस करेगी जांच, कहां मिली फर्जी डिग्री

अब मामले की जांच पुलिस के स्तर से होगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि जिन डिग्रियों और अंकपत्रों को विश्वविद्यालयों ने अपने यहां का नहीं बताया, वे संबंधित अधिवक्ताओं तक कैसे पहुंचे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, छापने या उपलब्ध कराने में कोई व्यक्ति या गिरोह शामिल है या नहीं है। दस्तावेजों की जांच के साथ संबंधित अधिवक्ताओं से भी पूछताछ की जा सकती है।

करीब 100 लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है। इन सभी के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराई गई, जिसमें अंकपत्र और डिग्री फर्जी पाए गए हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराने पर भी इन दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हुई। अब पुलिस मामले की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि फर्जी डिग्री और अंकपत्र कहां से हासिल किए गए।

आरके शुक्ला, सचिव, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश

फर्जी डिग्री और अंकपत्र से जुड़े मामलों में कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिकायतों के साथ उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के आधार पर लगातार एफआईआर दर्ज की जा रही है। प्रत्येक मामले में तथ्यों की जांच की जा रही है। दस्तावेजों के सत्यापन और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -विद्युत गोयल, एसीपी, सिविल लाइंस

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