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High Court : विशेष अधिनियमों में पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर अवैध, चेक बाउंस में दर्ज मुकदमा रद्द

Fri, 29 Aug 2025 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 29 Aug 2025 04:36 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष अधिनियमों में पुलिस की ओर दर्ज एफआईआर अवैध है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने चेक बाउंस मामले की संपूर्ण कार्यवाही रद्द कर दी।

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FIR filed by police under special acts is illegal, case filed in check bounce case cancelled
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष अधिनियमों में पुलिस की ओर दर्ज एफआईआर अवैध है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने चेक बाउंस मामले की संपूर्ण कार्यवाही रद्द कर दी। हालांकि, धोखाधड़ी और ठगी के मुकदमों को जारी रखने की अनुमति दी। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने सुधीर कुमार गोयल की अर्जी पर दिया।

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बुलंदशहर के कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने सुधीर गोयल संग दो भूखंड बुक किए और 30 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया। आरोप है कि सुधीर ने उन भूखंडों को तीसरे पक्ष को बेच दिया और बाद में शिकायतकर्ता को चार चेक जारी किए जो बाउंस हो गए। इसके बाद पुलिस ने सुधीर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस मुकदमे की पूरी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए सुधीर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
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आवेदक के वकील ने दलील दी कि चेक बाउंस मामले में प्राथमिकी दर्ज करना और उसके बाद की कानूनी कार्यवाही अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। चेक बाउंस मामले में किसी भी अपराध का संज्ञान केवल चेकधारक की लिखित शिकायत के आधार पर लिया जा सकता है न कि पुलिस रिपोर्ट के आधार पर। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया और चेक बाउंस में दर्ज पुलिस एफआईआर को रद्द कर दिया। साथ ही ट्रायल कोर्ट को अन्य अपराधों धोखाधड़ी और विश्वासघात के लिए आरोपों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।

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इन विशेष अधिनियमों में पुलिस नहीं दर्ज कर सकती एफआईआर

कोर्ट ने यूपी पुलिस और अभियोजन निदेशालय के सहयोग से एक सूची तैयार कराई है। इसमें ऐसे विशेष अधिनियम शामिल किए गए हैं जिनमें पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं। इनमें घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, खान और खनिज अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, परक्राम्य लिखत अधिनियम और विभिन्न पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा अधिनियम शामिल हैं।

वे अधिनियम जहां पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर सकती है

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक एक्ट, शस्त्र अधिनियम, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार है।

जिला न्यायाधीशों को जारी किया निर्देश

हाईकोर्ट ने बिना विचार किए मजिस्ट्रेट की ओर से पारित किए जा रहे आदेश पर चिंता जताई। कहा, इससे हाईकोर्ट पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है। कोर्ट ने जिला न्यायाधीशों को विशिष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे सभी न्यायिक अधिकारियों को संवेदनशील बनाएं और उन्हें विशेष अधिनियमों के उल्लंघन में दायर पुलिस रिपोर्ट का संज्ञान न लेने का निर्देश दें। आदेश की एक प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (अभियोजन) और डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी के अतिरिक्त महानिदेशक को भेजने का निर्देश दिया।

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