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प्रयागराज : एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर महिला प्रोफेसर पर पांच लाख का जुर्माना

Sat, 24 Feb 2024 12:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 24 Feb 2024 12:19 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि तुच्छ मामला दायर करने से आवेदक और उसके सहयोगियों, जो प्रोफेसर और उच्च नैतिकता और प्रतिष्ठा वाले लोग हैं, की प्रतिष्ठा खराब हुई। उन्हें खुद को बचाने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, पुलिस थाने से लेकर अदालत तक दौड़ना पड़ा।

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Fine of five lakhs on female professor for misuse of SC/ST Act.
कोर्ट (प्रतीकात्मक) - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तीन प्रोफेसर पर एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए मुकदमे को रद्द कर दिया। साथ ही एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर महिला प्रोफेसर पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। प्रो. जावेद अख्तर, प्रो. मन मोहन कृष्णा और प्रो. प्रह्लाद कुमार ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अलग-अलग प्रार्थनापत्र दायर की थी। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

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मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष द्वारा ठीक से पढ़ाने की हिदायत दी गई थी। मामला बढ़ने पर महिला प्रोफेसर ने कई आरोप लगाते हुए 2016 में कर्नलगंज थाने में एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसमें प्रो. जावेद अख्तर, प्रो. मन मोहन कृष्णा और प्रो. प्रह्लाद कुमार को आरोपी बनाया गया। विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी अधिनियम, इलाहाबाद द्वारा पारित सम्मन आदेश दिनांक 18.11.2016 को रद्द करने की प्रार्थना करते हुए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर की गई थी।
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कोर्ट ने कहा कि तुच्छ मामला दायर करने से आवेदक और उसके सहयोगियों, जो प्रोफेसर और उच्च नैतिकता और प्रतिष्ठा वाले लोग हैं, की प्रतिष्ठा खराब हुई। उन्हें खुद को बचाने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, पुलिस थाने से लेकर अदालत तक दौड़ना पड़ा। जबकि यह केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध लेने के लिए आवेदक के खिलाफ दायर किया गया झूठा और तुच्छ मामला था। कोर्ट ने दर्ज मुकदमे को रद्द करते हुए महिला प्रोफेसर पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि आवेदक को देने का आदेश दिया।

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