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High Court : छोटी सी रकम के लिए याचिका दायर करना आश्चर्यजनक, हाईकोर्ट ने एलआईसी को लगाई फटकार
Thu, 01 May 2025 02:25 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 01 May 2025 02:25 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छोटी सी धनराशि के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने पर आश्चर्य जताते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को कड़ी फटकार लगाई है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने सात मई की तिथि मुकर्रर की है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छोटी सी धनराशि के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने पर आश्चर्य जताते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को कड़ी फटकार लगाई है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने सात मई की तिथि मुकर्रर की है। केस की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ कर रही है। याचिका में अलीगढ़ की स्थायी लोक अदालत की तरफ से पारित 74 हजार 508 रुपये के अवॉर्ड को चुनौती की गई है। इस पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने कहा इतनी छोटी राशि के खिलाफ एलआईसी द्वारा रिट याचिका दाखिल करना अत्यंत आश्चर्यजनक है।
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कोर्ट ने निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी को यह स्पष्ट करने के लिए शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है कि अवॉर्ड की राशि पालिसी धारक (प्रतिवादी नंबर-2) को क्यों नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा, ‘याचिका दायर करने में जो वकील की फीस एवं कानूनी खर्च हुआ, वह स्थायी लोक अदालत द्वारा दिए गए अवॉर्ड राशि से अधिक प्रतीत होता है। मामला यह है कि स्थायी लोक अदालत ने एलआईसी को पालिसीधारक मेघ श्याम शर्मा को जमा की गई राशि वापस करने के साथ-साथ सात प्रतिशत ब्याज और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में चुकाने का निर्देश दिया था।
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पालिसीधारक ने की थी प्रीमियम राशि वापसी की मांग
पालिसीधारक ने जमा की गई प्रीमियम राशि की वापसी की मांग की थी। उसने पांच बीमा पालिसियां खरीदी थीं, जो बाद में शर्तों को पूरा न होने के कारण निष्क्रिय हो गईं, चूंकि निष्क्रिय पालिसियों पर कोई लाभ देय नहीं था इसलिए लोक अदालत ने एलआईसी को जमा राशि वापस करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट में एलआईसी ने तर्क दिया कि प्रतिवादी ने पालिसी की सभी शर्तों का पालन नहीं किया था, इसलिए वह किसी भी राशि के हकदार नहीं हैं। इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि प्रतिवादी केवल अपनी जमा राशि की वापसी मांग रहा है और लोक अदालत ने कोई अतिरिक्त या अवैध राहत नहीं दी है।
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