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महिला हॉस्टलों में बंदियों जैसी है छात्राओं की हालत

Fri, 14 Feb 2020 01:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2020 01:27 AM IST
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Female hostels are in the condition of female students like detainees
Female hostels are in the condition of female students like detainees - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के महिला छात्रावास परिसर में निरीक्षण करने पहुंचीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा वहां की हालत देख काफी नाराज हुईं। छात्राओं से बातचीत में उन्हें तमाम ऐसी शिकायतें मिलीं जो चौंका देने वाली थीं। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि महिला हॉस्टल में छात्राओं की स्थिति बंदियों जैसी है। छेड़खानी से बचाने के लिए उन्हें हॉस्टल में कैद करके रखा जाए, यह सरासर अन्याय है।
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उन्होंने कुलपति प्रो. आरआर तिवारी से कहा है कि विश्वविद्यालय में ब्वॉयज और गर्ल्स हॉस्टल में आने-जाने का समय एक समान किया जाएगा। शाम ढलते ही महिला छात्रावास परिसर के मेन गेट और अंदर के हॉस्टल के गेट पर ताला लगा देना छात्राओं को कैद रखने के समान है। साथ ही लैंगिक असमानता भी दर्शाता है। आयोग अध्यक्ष के मुताबिक छात्राओं ने उन्हें बताया कि हॉस्टल में केवल एक आरओ लगा है। मेस और हॉस्टल के अंदर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो छात्राओं की निजता के खिलाफ है। वहीं, इविवि में सोलर पैनल भी है, जिसका मेंटेनेंस 20 वर्षों तक फ्री है और इसके बावजूद छात्राओं से बिजली बिल की वसूली की जा रही है।
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छात्राओं को कमरे में अपने पैसे से बल्ब और पंखे लगाने पड़ते हैं। आयोग अध्यक्ष ने हैरत जताई कि आखिर इतने अर्से से हॉस्टल में यह सबकुछ चल रहा था और यहां के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अफसरों ने कुछ भी नहीं बोला। सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किए। अध्यक्ष ने कहा कि मैं इविवि के उन शिक्षकों और अफसरों ने पूछना चाहती हैं कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसे हॉस्टल में रखकर पढ़ाएंगे। आयोग अध्यक्ष ने यह सवाल भी उठाया कि इविवि को लगातार करोड़ों रुपये अनुदान के रूप में मिलते रहे। आखिर करोड़ों रुपये कहां गए। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
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यौन उत्पीड़न के आरोपी शिक्षकों की फिर खुलेगी फाइल
प्रयागराज। राष्ट्रीय महिला आयोग की अंतरिम रिपोर्ट में प्रो. हांगलू के अलावा पांच अन्य शिक्षकों के नाम भी शामिल थे, जिन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस बारे में भी कुलपति से बता की। अध्यक्ष के मुताबिक उन्हें कुछ पुरानी जांच रिपोर्ट दी गई हैं, जिनमें इन शिक्षकों को क्लीन चिट दी गई थी। अध्यक्ष का कहना है कि वे इस पुरानी रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। इसका अध्ययन करेंगी और आरोपी शिक्षकों की फाइलें फिर खुलेंगी।
अध्यक्ष ने कहा, नौकरी छोड़ देना कोई सजा नहीं
प्रयागराज। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोप में नौकरी छोड़ देना कोई सजा नहीं है। ऐसे मामलों में सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए। पूर्व कुलपति प्रो. हांगलू एवं एक महिला साहित्यकार के बीच हुई अमर्यादित बातचीत के कथित ऑडियो के मसले पर उन्होंने कहा कि अगर कोई कहे भी कि उसने यौन उत्पीड़न नहीं किया है तो भी उसे क्लीन चिट नहीं दी जा सकती। अपनी अथॉरिटी का गलत उपयोग करते हुए किसी महिला से अमर्यादित बातचीत भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आती है।
अब कुलपति सुनते हैं छात्राओं की समस्या
प्रयागराज। आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा के अनुसार छात्राओं ने उन्हें बताया कि अब उनकी बात सुनी जाती है। कुलपति भी मिलने का समय आसानी से दे देते हैं और समस्याओं का निराकरण भी हो जा रहा है। वहीं, प्रो. हांगलू के समय न तो कोई समस्याएं सुनने वाला था और न ही कुलपति मिलते थे।
नेहा ने की प्रतिबंध हटाने की मांग
प्रयागराज। इविवि की शोध छात्र नेहा यादव के साथ कुछ अन्य छात्राओं ने महिला आयोग की अध्यक्ष को ज्ञान सौंपा। नेहा ने इविवि प्रशासन की ओर से उन पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाने की मांग की। नेहा ने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षकों ने उन्हें झूठे आरोपों में फंसा दिया था। अध्यक्ष से मांग की कि संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए और उन्हें बर्खास्त किया जाए। शोधार्थी प्रियंका और रिचा सिंह ने छात्राओं की समस्या पर ध्यान देने के लिए महिला आयोग के प्रति आभार जताया है।

क्रेट के मामले में भी की शिकायत
प्रयागराज। वाणिज्य विभाग में पीएचडी प्रवेश परिणाम निरस्त किए जाने को लेकर छात्राओं ने आयोग अध्यक्ष से शिकायत की। कुछ छात्राओं ने इसके लिए एचओडी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पीएचडी प्रवेश में धांधली के कारण विभाग में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसी स्थिति दोबारा न आए, सो एचओडी को हटाया जाए। वहीं, कुछ छात्राओं ने ज्ञापन देकर कहा कि कुलपति की ओर से रिजल्ट निरस्त किए जाने के निर्णय को गलत बताया और कहा कि यह चयनित विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। छात्राएं अपनी समस्याएं कुलपति को बताना चाहती हैं लेकिन उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा।
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