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हाईकोर्ट सख्त : फाइल मौजूद न होने के कारण सुनवाई टलवाने का फैशन, अधिकारियों को चेताया

Thu, 02 Feb 2023 11:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Feb 2023 11:18 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कोर्ट में फाइल पहुंचाने, केस की मांगी गई जानकारी या जवाबी हलफनामा समय से उपलब्ध कराने की ऐसी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है जिससे मुकदमों की सुनवाई स्थगित न करनी पड़े और तय तिथि पर सुनवाई की जा सके।

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Fashion to postpone hearing due to non-availability of file warned officials
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कोर्ट में फाइल पहुंचाने, केस की मांगी गई जानकारी या जवाबी हलफनामा समय से उपलब्ध कराने की ऐसी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है जिससे मुकदमों की सुनवाई स्थगित न करनी पड़े और तय तिथि पर सुनवाई की जा सके। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि सरकार के सहयोग के बगैर बिना देरी किए त्वरित न्याय दे पाना संभव नहीं है।

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कोर्ट ने कहा सुनवाई के समय फाइल मौजूद न होने या मांगी जानकारी न उपलब्ध होने के कारण सुनवाई टलवाने का फैशन हो गया है, जो न्याय देने की प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न करता है। इस पर सख्ती की जाए। कोर्ट ने चेतावनी के लहजे में कहा कि अधिकारियों की ढिलाई से सुनवाई स्थगित हुई तो कोर्ट भारी हर्जाना लगाएगी।

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कोर्ट ने अर्जी को सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि तय करते हुए आदेश की प्रति महाधिवक्ता व प्रमुख सचिव न्याय को भेजने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने सादिम वह दो अन्य की अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा दूसरी बार पुकार के बावजूद फाइल न होने के आधार पर सुनवाई स्थगित करने की प्रार्थना की गई। कोर्ट ने कहा ऐसी ही प्रार्थना 20 केसों में की गई। कोर्ट ने कहा दो दिन पहले केस लिस्टिंग सूची जारी कर दी जाती है। इसके बावजूद फाइल का न आना न्याय प्रशासन में अवरोध डालना है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह नागरिक अधिकारों की रक्षा करे और सांविधानिक संस्था के प्रति जन विश्वास बढ़ाए। प्रगतिवादी सोच व सद्भावना पूर्ण कार्य किया जाना चाहिए। सरकारी वकील कोर्ट को सहयोग देने के लिए है। अधिकांश की फाइल नहीं है, जो शीघ्र न्याय देने की योजना को अवरूद्ध कर रही है। निर्धारित तिथि पर केस तय करने में कोर्ट को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जिसका समाधान किया जाना चाहिए।

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