Prayagraj : हाईकोर्ट के रिटायर डिप्टी रजिस्ट्रार की करोड़ों की जमीन का फर्जी बैनामा, भू माफिया से मिल रही धमकी
फूलपुर तहसील के झूंसी में हाईकोर्ट के रिटायर डिप्टी रजिस्ट्रार अटल सिंह यादव की नौ बीघे जमीन को कूटरचित दस्तावेजों से न सिर्फ रजिस्ट्री करा लिया गया, बल्कि खतौनी में नाम दर्ज करा उसे बेच भी दिया गया।
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फूलपुर तहसील के झूंसी में हाईकोर्ट के रिटायर डिप्टी रजिस्ट्रार अटल सिंह यादव की नौ बीघे जमीन को कूटरचित दस्तावेजों से न सिर्फ रजिस्ट्री करा लिया गया, बल्कि खतौनी में नाम दर्ज करा उसे बेच भी दिया गया। जब भू- माफिया जमीन पर कब्जा करने पहुंचे तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। रिटायर डिप्टी रजिस्ट्रार की शिकायत पर भू-माफिया का खतौनी से नाम तो निरस्त हो गया, लेकिन स्पष्ट आदेश के बावजूद दोषियों के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की गई। परेशान रिटायर डिप्टी रजिस्ट्रार ने क्षुब्ध होकर कोर्ट की शरण ली है।
झूंसी थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव में डिप्टी रजिस्ट्रार अटल सिंह यादव की नौ बीघा जमीन है। उक्त जमीन पर अटल सिंह, निगम सिंह, वासुदेव सिंह का नाम बतौर संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। नौ बीघे जमीन की कीमत इस वक्त 35 से 40 करोड़ रुपये बताई गई है। 15 अगस्त 2015 यानि स्वतंत्रता दिवस के अवकाश वाले दिन कूटरचना करके झूंसी के नौ लोगों ने फर्जी बैनामा करा लिया।
फर्जी बैनामे में महिलाओं के भी नाम हैं। यही नहीं 28 अगस्त 2024 को खतौनी में भी नाम दर्ज करा लिया गया। खतौनी में नाम दर्ज होने के बाद उक्त जमीन का उपर्युक्त फर्जी बैनामा 12 जून 2024 को एक दूसरी महिला को रजिस्टर्ड इकरारनामा भी कर दिया गया।
बिना वाद और पत्रावली के नामांतरण का आदेश कर दिया गया जारी
भू -माफिया ने जब जमीन खाली करने की धमकी रिटायर हाईकोर्ट रजिस्ट्रार अटल को मिली तो वह फूलपुर तहसील पहुंचे और खतौनी निकलवाई तो वह भौंचक रह गए। रिटायर रजिस्ट्रार और उनके भाइयों ने किसी को रजिस्ट्री किया ही नहीं था तो खतौनी से उनके नाम कैसे कट गए। 18 जनवरी 2025 को फूलपुर एसडीएम को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।
तहसीलदार ने मामले की जांच कराई तो तथ्य चौंकाने वाले निकले। प्रेषित जांच रिपोर्ट में दर्शाया गया कि 28 अगस्त 2024 को जिस न्यायालय के आदेश पर कंप्यूटर की खतौनी में नामांतरण आदेश फीड किया गया था। उस न्यायालय में न तो कोई वाद दायर है और न ही कोई पत्रावली उपलब्ध है। यही नहीं रजिस्ट्री दफ्तर में भी बैनामे से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिला।
तहसीलदार ने दोषियों के विरुद्ध एफआईआर का दिया निर्देश
झूंसी। 23 जनवरी 2025 को रिपोर्ट मिलने पर तत्कालीन तहसीलदार ने एक फरवरी को नायब तहसीलदार को तत्काल फर्जी आदेश निरस्त करते हुए दोषी पेशकार व अन्य के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी कर दिया। फर्जी बैनामा धारकों का नाम तो निरस्त हो गया लेकिन दोषियों के विरुद्ध एफआईआर नहीं दर्ज कराई गई। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिटायर रजिस्ट्रार अटल ने अंततः कोर्ट की शरण ली है।
किसान को बेवजह मिल रही सजा
अफसरों की शिथिलता कह लीजिए या फिर मिलीभगत, ऐसे फर्जी कारनामों की वजह से रिटायर रजिस्ट्रार अटल को महीनों से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ रही वह अवर्णनीय है। फूलपुर तहसील के अधिवक्ताओं की मानें तो खतौनी में नाम गड़बड़ी की ढ़ेरों शिकायतें हैं और सैकड़ों अनावश्यक वाद लंबित चल रहे हैं।
इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। इस प्रकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी ली जा रही है। - सत्यपाल चौहान, प्रभारी तहसीलदार फूलपुर