फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Excursions: the Ganges water would then elixir

आस : फिर होगा गंगा का पानी अमृत

Fri, 01 May 2015 02:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Fri, 01 May 2015 02:40 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। तजाकिस्तान के जाने-माने कृषि विज्ञानी एवं अर्थशास्त्री प्रो. उमारोव ने गंगा जल के अमृत स्वरूप की फिर से आस जगाई है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजीव गांधी चेयर की ओर से ‘राज्य, हाशिए के लोग एवं सशक्तिकरण’  विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार भाग लेने आए प्रो. उमारोव ने गंगा की सफाई के लिए आर्गेनिक खेती पर जोर दिया है। उनका कहना है कि आर्गेनिक खेती एवं ह्यूमन वेस्ट का सही तरीके से मैनेजमेंट करके ही गंगा की सफाई की जा सकती है।
विज्ञापन


तजाकिस्तान के अर्थशास्त्र एवं जननांकीय संस्थान दुशांवे में विभागाध्यक्ष तथा कृषि अर्थशास्त्री प्रो. उमारोव हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम से काफी प्रभावित दिखाई पड़े। अमर उजाला से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए किसान भी आर्गेनिक खेती, सोलर सिस्टम एवं वेस्ट मैनेजमेंट को अपनाकर देश के विकास में योगदान कर सकते हैं। जाने माने अर्थशास्त्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियां जहां देश के लाभकारी हैं तो वहीं मनमोहन सिंह की नीतियों के कारण मार्केट एवं मनी को ही वरीयता मिली।
विज्ञापन


अर्थशास्त्री प्रो. उमारोव ने जोर देकर कहा कि आर्गेनिक खेती स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण एवं भारत की नदियों केलिए भी लाभदायक है। उन्होंने वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया समझाते हुए उन्होंने कहा कि गोबर को बायो फ्यूल के रूप में प्रयोग करके पेट्रोलियम पदार्थों को बचा सकते हैं। प्रो.उमारोव तजाकिस्तान के जाने माने राजनीतिक भी हैं, वह राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत दखल भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गंगा को साफ करने की जो पहल की गई है, वह सराहनीय है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके लिए उन्होंने जर्मनी के लोगों की ओर से अपनी नदियों को साफ करने के लिए अपनाई गई वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली को सराहा। उन्होंने कहा कि आर्गेनिक खेती करने से खेतों के जरिए नदियों में होने वाला प्रदूषण तो रुकेगा ही साथ ही अपशिष्ट पदार्थों का भी जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने गंगा के साथ यमुना की दशा को लेकर भी चिंता जताई। प्रो. उमारोव भारतीय संस्कृति एवं यहां की नदियों से काफी प्रभावित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed