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खुदा की बारगाह में हुआ हर कोई हाजिर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 19 Jun 2015 01:58 AM IST
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इलाहाबाद। शाबान के पूरे तीस रोज बाद बृहस्पतिवार को रमजान का चांद दिखा तो रोजेदारों के चेहरे खिल उठे। शाबान की 29वीं शब को रमजान का चांद नजर नहीं आया था, ऐसे में 30वीं शब चांद रात रही। लोगों ने अपने घर की छतों या किसी ऊंची जगह से भी रमजान के चांद को देखने की कोशिश की। शाम से ही यह बेताबी तेज हो गई थी। रमजान का चांद नजर आने के साथ ही माहे मुकद्दस के लिए मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हुआ जो रात तक जारी रहा।
चांद रात के साथ ही शहर की तमाम मस्जिदों में तरावीह का सिलसिला भी शुरू हुआ। तमाम रोजेदार तय वक्त पर खुदा की बारगाह में जुटे और फिर इबादत में मशगूल हो गए।
चौक स्थित जामा मस्जिद सहित कंपनी बाग, इलाहाबाद जंक्शन के सामने वाली मस्जिद सहित शहर की तमाम मस्जिदों में तरावीह के लिए रोजेदारों की जमात जुटी। जहां तीन शब की तरावीह है, वहां तरावीह का सिलसिला आधी रात के बाद तक जारी रहा, जहां 27 शब की तरावीह है, वहां तरावीह कुछ घंटे बाद पूरी हुई। मस्जिदों में मुकद्दस नजारा रहा, खुदा की बारगाह में सभी ने हाजिरी लगाई।
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फजीलतें, रहमतें लेकर आया माहे मुकद्दस
माहे मुकद्दस रमजान के दौरान एक रात की इबादत हजारों महीनों की इबादत से बेहतर है। रसूल पाक ने फरमाया कि रोज़ा जहन्नुम की आग से बचाने का जरिया है ताकि रोजे से इंसान परहेजगार होकर गुनाह और बुराइयों से दूर रहे। अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि जो इंसान इस महीने में रोजा रखता और अल्लाह की इबादत करता है, अल्लाह उससे खुश होकर उसके सभी गुनाहों को माफ कर देता है।
मौलाना सैयद हसन रजा
इमाम जुमा व जमात, शिया जामा मस्जिद, चक
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चांद रात के साथ ही शहर की तमाम मस्जिदों में तरावीह का सिलसिला भी शुरू हुआ। तमाम रोजेदार तय वक्त पर खुदा की बारगाह में जुटे और फिर इबादत में मशगूल हो गए।
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चौक स्थित जामा मस्जिद सहित कंपनी बाग, इलाहाबाद जंक्शन के सामने वाली मस्जिद सहित शहर की तमाम मस्जिदों में तरावीह के लिए रोजेदारों की जमात जुटी। जहां तीन शब की तरावीह है, वहां तरावीह का सिलसिला आधी रात के बाद तक जारी रहा, जहां 27 शब की तरावीह है, वहां तरावीह कुछ घंटे बाद पूरी हुई। मस्जिदों में मुकद्दस नजारा रहा, खुदा की बारगाह में सभी ने हाजिरी लगाई।
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फजीलतें, रहमतें लेकर आया माहे मुकद्दस
माहे मुकद्दस रमजान के दौरान एक रात की इबादत हजारों महीनों की इबादत से बेहतर है। रसूल पाक ने फरमाया कि रोज़ा जहन्नुम की आग से बचाने का जरिया है ताकि रोजे से इंसान परहेजगार होकर गुनाह और बुराइयों से दूर रहे। अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि जो इंसान इस महीने में रोजा रखता और अल्लाह की इबादत करता है, अल्लाह उससे खुश होकर उसके सभी गुनाहों को माफ कर देता है।
मौलाना सैयद हसन रजा
इमाम जुमा व जमात, शिया जामा मस्जिद, चक