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चारागाह भूमि के अतिक्रमण पर हो सकती है सिविल, आपराधिक कार्यवाही: हाईकोर्ट

Wed, 03 Mar 2021 08:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 03 Mar 2021 08:40 PM IST
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Encroachment of pasture land may lead to civil, criminal proceedings: High Court
allahabad high court - फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गांव सभा की चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सिविल व आपराधिक, दोनों कार्यवाही की जा सकती है। सार्वजनिक उपयोग की चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इंकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि गांव सभा की सार्वजनिक उपयोग की भूमि है।
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उप्र राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत बेदखली व नुकसान की भरपाई करने की व्यवस्था है तथा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3(1)  एवं धारा 425 भारतीय  दंड संहिता के तहत दंडित करने की आपराधिक कार्यवाही की व्यवस्था की गई है। राजस्व संहिता में कार्यवाही की सिविल प्रक्रिया होने के कारण आपराधिक कार्यवाही करने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने आपराधिक केस को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति अनिल कुमार की खंडपीठ ने गुजराती देवी इंटर कालेज कंधारपुर, आजमगढ़ के प्रबंधक देवनाथ यादव की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि कालेज के पास चारागाह की खाली जमीन बेकार पड़ी थी। बच्चों के हित में बाउंड्री से घेर लिया गया है। जिससे बेदखली की कार्यवाही राजस्व संहिता के तहत की जा सकती है। इसलिए लोक संपत्ति क्षति निवारण एक्ट के तहत आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाए। उन्होंने कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। जिसने बंजर जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में आपराधिक कार्यवाही न चलाने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि राजस्व संहिता की कार्यवाही सिविल प्रकृति की संक्षिप्त कार्यवाही है। जिसमें बेदखली व नुकसान की वसूली की जा सकती है। दंड की व्यवस्था नहीं है। लोक संपत्ति क्षति निवारण एक्ट में भारतीय दंड संहिता के अपराध के लिए पांच साल की कैद व जुर्माने की व्यवस्था दी गई है। दोनों अलग हैं। दोनों कार्यवाही एक साथ की जा सकती है। याची ने अतिक्रमण स्वीकार किया है। उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही में हस्तक्षेप का कोई वैधानिक आधार नहीं है। इसलिए राहत नहीं दी जा सकती।
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