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भावनात्मक तनाव से भी हो सकता है अस्थमा : डॉ. आशुतोष गुप्ता
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दवाइयां, शराब और कई बार भावनात्मक तनाव भी अस्थमा का कारण बनते हैं। कुछ लोगों में यह आनुवांशिक होती है। यह बातें रविवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सभागार (एएमए) में आयोजित व्याख्यान में डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताईं।
उन्होंने बताया कि अस्थमा (दमा) होने पर श्वास नलियों में सूजन आ जाती है। श्वसन नली में सिकुड़न के कारण रोगी को सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्याएं होने लगती हैं।
मधुमेह के बारे में जानकारी देते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने कहा कि अनुवांशिक के अलावा मोटापा, तनाव, सही खानपान की कमी और व्यायाम न करना डायबिटीज का प्रमुख कारण है। मुधमेह के मरीजों को संतुलित और नियमित खान-पान बहुत जरूरी है। डाइट चार्ट का पालन करके अपनी डायबिटीज को नियंत्रित करने के साथ ही इंसुलिन की डोज में भी कमी ला सकते हैं।
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मधुमेह के मरीजों को चिंता रहती है कि वह अपनी मनपसंद चीजों का सेवन नहीं कर पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं है, डायबिटीज के साथ भी मन पसंद खाना खा सकते हैं लेकिन छोटे भाग यानी पोर्शन साइज का ध्यान रखना होगा। लंबे अंतराल में उन चीजों का सेवन करना होगा। हर दिन 1500-कैलोरी के लक्ष्य के आसपास रहना होगा। व्याख्यान के दौरान एएमए अध्यक्ष डॉ. कमल सिंह व अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
कार्बोहाइड्रेट में क्या लें
साबुत अनाज (जई, भूरे चावल, क्विनोआ), फलियां और सब्जियां चुनें। ये खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ग्लूकोज बढ़ाते हैं। जिससे शुगर लेवल में अचानक बढ़ोतरी को रोका जा सकता है। इसके अलावा मछली, पोल्ट्री, टोफू और फलियां जैसे प्रोटीन के स्रोत शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखने में मददगार होते हैं।
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उन्होंने बताया कि अस्थमा (दमा) होने पर श्वास नलियों में सूजन आ जाती है। श्वसन नली में सिकुड़न के कारण रोगी को सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्याएं होने लगती हैं।
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मधुमेह के बारे में जानकारी देते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने कहा कि अनुवांशिक के अलावा मोटापा, तनाव, सही खानपान की कमी और व्यायाम न करना डायबिटीज का प्रमुख कारण है। मुधमेह के मरीजों को संतुलित और नियमित खान-पान बहुत जरूरी है। डाइट चार्ट का पालन करके अपनी डायबिटीज को नियंत्रित करने के साथ ही इंसुलिन की डोज में भी कमी ला सकते हैं।
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मधुमेह के मरीजों को चिंता रहती है कि वह अपनी मनपसंद चीजों का सेवन नहीं कर पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं है, डायबिटीज के साथ भी मन पसंद खाना खा सकते हैं लेकिन छोटे भाग यानी पोर्शन साइज का ध्यान रखना होगा। लंबे अंतराल में उन चीजों का सेवन करना होगा। हर दिन 1500-कैलोरी के लक्ष्य के आसपास रहना होगा। व्याख्यान के दौरान एएमए अध्यक्ष डॉ. कमल सिंह व अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
कार्बोहाइड्रेट में क्या लें
साबुत अनाज (जई, भूरे चावल, क्विनोआ), फलियां और सब्जियां चुनें। ये खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ग्लूकोज बढ़ाते हैं। जिससे शुगर लेवल में अचानक बढ़ोतरी को रोका जा सकता है। इसके अलावा मछली, पोल्ट्री, टोफू और फलियां जैसे प्रोटीन के स्रोत शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखने में मददगार होते हैं।